घड़साना पंचायत समिति में तीन करोड़ का घपला

– घपलेबाजों को सीईओ द्वारा संरक्षण दिये जाने का आरोप
श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर जिले में सीमावर्ती पंचातय समिति घड़साना की ग्राम पंचायतों में करवाये गये विकास एवं निर्माण कार्यांे में लगभग तीन करोड़ का घपला जनप्रतिनिधियों ने पकड़ा है। इस घपले को लेकर एक एफआईआर भी नई मण्डी घड़साना थाना में दर्ज हुए सात माह हो गये हैं। घपले में लिप्त पंचायत समिति के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामसेवकों पर कोई कार्रवाई न करते हुए उन्हें संरक्षण प्रदान करने का जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्राम मीणा पर लगाया गया है। जिला परिषद में डायरेक्टर विष्णु भाम्भू ने गुरुवार को स्थानीय पंचायती धर्मशाला में आयोजित प्रेस वार्ता में गबन-घपलों की परतें उधेडऩे वाले दस्तावेज पेश करते हुए बताया कि इसमें अनेक अधिकारी व कर्मचारी लिप्त हैं। जिला परिषद तथा पंचायत समिति की बैठकों में इन घपलों-गबन के मामले
बार-बार उठाये जाने पर जांच कमेटी गठित की गई थी। यह कमेटी घड़साना पंचायत समिति की 9 ग्राम पंचायतों में करवाये गये कार्यांे की जांच पिछले काफी समय से कर रही है। अब तक छह ग्राम पंचायतों की जांच पूरी हो चुकी है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में घपले व गबन पाये गये हैं। डायरेक्टर विष्णु भाम्भू ने आरोप लगाया कि बाकी तीन ग्राम पंचायतों में भी ऐसी ही गड़बडिय़ां पाये जाने को देखते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्राम मीणा ने जांच कमेटी में शामिल जेईएन विजयपाल सिंह का कल बुधवार को दोपहर 2 बजे अकस्मात ही तबादला कर दिया। इसके एक घंटे बाद उसे रिलीव भी करवा दिया। विजयपाल को पदमपुर थाना में लगाया गया है। उन्होंने कहा कि कमेटी अपनी जांच बड़ी ईमानदारी से कर रही थी। इस जांच में कईं जनों को फंसते हुए देखकर विश्राम मीणा ने यह तबादला किया है, जबकि प्रदेश में विधानसभा चल रही है। विधानसभा के चलते किसी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घपलों में सबसे अधिक संदिग्ध भूमिका मौजूदा वक्त मेें बांडा ग्राम पंचायत में तैनात ग्रामसेवक सुरेश सोरगर की
है। सुरेश पर विगत जुलाई माह में नई मण्डी घड़साना थाना में लगभग 90 लाख के गबन का एक मामला दर्ज है। इस 90 लाख की रकम सहित विभिन्न गड़बडिय़ों व घपलेबाजियों में लिप्त सुरेश सोरगर की तरफ एक करोड़ 44 लाख की वसूली निकाली हुई है। इसके अलावा एक करोड़ 60 लाख के गबन घोटाले और भी हुए हैं। ज्यादातर घपले बीएडीपी योजना के तहत आये बजट की राशि से करवाये गये कार्यांे में किये गये हैं। बीएडीपी योजना की मॉनिटरिंग सीधे सीईओ विश्राम मीणा द्वारा की जाती है। लिहाजा यह स्पष्ट परिलक्षित होता है कि यह सारे घपले विश्राम मीणा की देखरेख में ही हुए हैं। इसीलिए वे खुद को बचाने के साथ-साथ दूसरे दोषियों को भी बचाने में लगे हुए हैं। विष्णू भाम्भू ने कहा कि भाजपा के कतिपय विधायकों और नेताओं के वरदहस्त के कारण ही विश्राम मीणा लगभग तीन वर्षांे से यहां जिला परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। उन्होंने तमाम दस्तावेजों को उजागर करते हुए मांग की है कि इन घपलों व गबन में शामिल पंचायत समिति में सभी अधिकारियों, कर्मचारियों व ग्रामसेवकों पर न केवल कार्रवाई की जाये, बल्कि इनके खिलाफ
मुकदमे दर्ज करवाते हुए हड़पी गई राशि की वसूली की जाये।


correspondent

DESERTTIMES

DESERTTIMES

%d bloggers like this: