दो दिवसीय राज्य स्तरीय युवा लेखक सम्मेलन शुरू

साहित्य मनुष्यता की बात करता है-प्रो.हाड़ा
उदयपुर। राजस्थान साहित्य अकादमी के तत्वावधान में दो दिवसीय राज्य स्तरीय युवा लेखक सम्मेलन शनिवार को साहित्य अकादमी सभागार में शुरू हुआ।कार्यक्रम के उद्घाट्न समारोह की अध्यक्षता अकादमी अध्यक्ष डॉ. इंदुशेखर तत्पुरूष ने की। मुख्य अतिथि समाजसेवी प्रवीण रतलिया थे। विशिष्ट अतिथि सुरेन्द्र डी. सोनी थे। प्रो. माधव हाडा ने अपने बीज वक्तव्य मे युवा साहित्य एवं समकालीन साहित्यिक स्थिति के बारे में चर्चा की। प्रो. हाड़ा ने कहा कि साहित्य मनुष्यता की बात करता है इसे विभिन्न विमर्श में बांट कर नहीं लिखा जाना चाहिए। आज के लेखक अपनी परंपरा से विमुख होते जा रहे है जो कि ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक भीतर से आवाज नहीं आये, लिखना नहीं चाहिए। स्वागत उद्बोधन संयोजक गौरीकांत शर्मा द्वारा किया गया। संचालन चेतन औदिच्य ने किया। प्रथम सत्र राजस्थान की समकालीन कविता पर केंद्रित था। मुख्य वक्ता श्री सवाई सिंह शेखावत ने कहा कि कविता सिर्फ विचार से नहीं उपजती बल्कि वह विचार से कहीं आगे भाव के भीतर जन्म लेती है। उन्होंने इस अवसर नव लेखकों को लेखन के कई गुर भी बताएं। श्री शेखावत ने कहा कि राजस्थान कविता को प्रदेश से बाहर भी पहचान मिली है। युवाओ के लिए जमीन तैयार है और उन्हें इसका भरपूर फायदा उठाते हुए अपनी रचनाशीलता को धार देनी चाहिए। अध्यक्षता डॉ राजेन्द्र सिंघवी ने की। पत्र वाचक कौशल तिवारी और कृष्णा जांगिड़ ने अपने पत्र वाचन के माध्यम से समकालीन कविता की स्थिति की विवेचना की। कविता पाठ सत्र में आकाश नवरंगी, कुमार विजय, अरुण व्यास विजय मारु, प्रियदर्शनी वैष्णव, रतनपुरी गोस्वामी, नितिन मेनारिया, शिल्पा पांडे, प्रताप पागल ने कविता पाठ किया। सत्र का संचालन डॉ. कुंजन आचार्य ने किया।
द्वितीय सत्र राजस्थान की समकालीन कहानियों पर हुआ। अध्यक्षता प्रो. कुंदन माली ने की। वक्तव्य डा. आशीष सिसोदिया ने दिया। पत्रवाचन सतीश छीपा व कुशाग्र जैन ने किया। कहानी पाठ भागचंद गुर्जर, शकुंतला पालीवाल ने किया। सत्र का संचालन विमला महरिया ने किया।


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