मकर संक्रांति 2018: मंगल कार्यों की शुरूआत

जोधपुर। जब दिवाकर मकरस्थ होते हैं, तब सभी समय, प्रत्येक दिन एवं सभी स्थान शुभ हो जाते हैं। खरमास (पौष माह) में रुके हुए मंगल कार्य पुन: शुरू हो जाते हैं। यह स्नान पर्व मूल रूप से ऋतु चक्र परिवर्तन और नई कृषि उपज से जुड़ा है। वैदिक चिंतन कहता है कि इस अवसर पर जिस तरह सूर्यदेव की कृपा से हमारे अन्नदाता हमें नवान्न का उपहार देते हैं, उसी तरह यह आलोक पर्व हमें प्रबोधित करता है कि हम भी जड़ता व आलस्य त्याग कर नए सकारात्मक विचारों को ग्रहण करें। काम-क्रोध, मद-लोभ आदि दूषित विचारों से अपने अंतस को मुक्त कर नई जीवन ऊर्जा से कर्म पथ पर गतिमान हों। मकर संक्रांति सूर्योपासना का ऐसा ऋतु पर्व है, जो हमारे लौकिक जीवन को देव जीवन की ओर मोड़ता है। यह पर्व हमारे भीतर शुभत्व व नवजीवन का बोध भरकर हमें चैतन्य, जाग्रत, जीवंत व सक्रिय बनाता है। गौरतलब है कि एकमात्र सूर्य ही ऐसे प्रत्यक्ष देवता हैं, जो सतत क्रियाशील रहकर हम धरतीवासियों का भरण-पोषण करते हैं। इसीलिए हमारे ऋ षिगणों ने सूर्य को ‘विराट पुरुष’ की संज्ञा दी है। अल्लामा इकबाल ने ‘आफताब (सूर्य)’ की स्तुति के रूप में गायत्री मंत्र का बड़ा सुंदर अनुवाद उर्दू में किया है।


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DesertTimes.in

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