पचपदरा झील: परिंदों की मानिंद उड़ी मदद की “उम्मीद”

– पचपदरा झील को बचाए रखना अब बड़ी चुनौती
– सांसद कर्नल सोनाराम के सवाल के जवाब में मंत्री बोले- नहीं, प्रश्न ही नहीं उठता
– कर्नल के वित्तीय सहायता के सवाल पर पल्ला झाड़ा उनकी ही सरकार के मंत्री ने
– हर साल यहां बड़ी तादाद में मेहमान बन आते है विदेशी परिंदे

दिल्ली। राजस्थान के बाड़मेर ज़िले के बालोतरा तहसील के पचपदरा गाँव की खारे पानी की पचपदरा झील के संरक्षण और विकास की उम्मीद अब दम तोड़ती नजर आ रही है। केन्द्र की भाजपा सरकार राजस्थान की इस नमक झील के अलावा किसी अन्य झील के लिए भी आर्थिक सहायता देने की दिशा में नहीं सोच रही। महकमे के मंत्री का कहना है कि इसे लेकर कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है। ऐसे में आर्थिक मदद देने जैसा सवाल ही नहीं बनता।

सांसद के सवाल के जवाब में साफ ना

बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से भाजपा का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद कर्नल सोनाराम को उनकी ही सरकार के मंत्री ने उनके उठाए सवाल के जवाब में साफ ना बोल दिया है। दरअसल लोकसभा में बाड़मेर-जैसलमेर से भाजपा सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पचपदरा और राजस्थान की अन्य झीलों को वित्तिय सहायता देने के बारे में जानना चाहा, इस पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री डा.महेश शर्मा ने साफ ना कहते हुए कहा कि इस बारे में किसी प्रकार को न तो कोई प्रस्ताव लंबित है और न ही इस विषय पर आपका कोई सवाल बनता है।

कर्नल संजीदा, सरकार नहीं
राजस्थान की झीलों में हर साल आने वाले प्रवासी पक्षियों को सरंक्षण देने और उनको बेहतर माहौल देने को लेकर जहां कर्नल सोनाराम चौधरी संजीदा सवालों से जिम्मेदारी वाले जवाब सरकार से चाहते थे, वहीं सरकार ये मानते हुए भी कि इनकी आवक कम हुई है, बावजूद इनके संरक्षण को लेकर कोई वित्तीय प्रावधान देने को तैयार नहीं। सरकार के मंत्री का कहना है कि इसे लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है।

कर्नल बोले मंत्रालय बताए क्या आकर्षित होंते है
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से लोकसभा में सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी ने जानना चाहा कि क्या अनुकुल जलवायु प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करती है और क्या इनकी संख्या दिनोदिन घट रही है? जवाब में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री डा.महेश शर्मा ने कहा कि हां। साथ में कहा कि इनकी संख्या में भी कमी नजर आ रही है।

रिपोर्ट में माना कि घट रहा परिंदों का रूझान

वेटलैंड इंटरनेशनल की ओर से सबमिट की गई रिपोर्ट “एशिएन वाटर बर्ड सेंसस” के अनुसार कुछ क्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों का घटता रुझान देखा गया है। साथ में यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर यथावत है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नमभूमि प्रदुषण, शिकार, पेस्टीसाइडस, उर्वरक का अंधा-धुध इस्तेमाल भी इनकी घटते रुझान का सबब है।
बोले कर्नल
इस बारे में जब deserttimes.in ने सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी से बात की तो वे बोले कि पचपदरा झील के संरक्षण और प्रवासी पक्षियों के यहां अाने और ठहरने के लिए माहौल बनाने की जरूरत है। वे इसके संरक्षण के मामले में पहले भी लोकसभा में सवाल उठाते रहे है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यहां प्रवासी पक्षियों का आना बंद ही हो जाएगा।

correspondent

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