बागवानी के क्षैत्र में समग्र विकास हो : सांसद पटेल

जालोर। जालोर-सिरोही सांसद देवजी पटेल ने बुधवार को लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान देष में बागवानी को बढावा देने का मुद्दा उठाया।
सांसद पटेल ने कृषि राज्य मंत्री प्रषोत्तम रूपाला से प्रष्न करने हुए कहा कि देष में बागवानी क्षैत्र में एकिकृत विकास हेतु क्षैत्र मे बागवानी मिषन कि मुख्य विषेषताए क्या है; और इसके तहत प्रदान कि जाने वाली सुविधा का ब्यौरा क्या हैं? मिषन के अन्तर्गत एक जिले व तहसिल को शामिल करने हेतु क्या मापदण्ड क्या अपनाया जा रहा हैं; मिषन के तहत शामिल किये गये जिला एवं ब्लाॅको का क्या राज्य वार ब्यौरा क्या हैं। बागवानी क्षैत्र कि उन फसलो का ब्यौरा क्या हैं जिने मिषन के अन्तर्गत शामिल किये जाने कि सम्भावना हैं। क्या मिषन के अन्तर्गत कटाई के पश्चात किन्ही आधारभूत ईकाइयों की स्थापना कि गई हैं। यदि हा तो तत्सबंधी ब्यौरा क्या हैं। क्या जलवायु परिर्वतन को देखते हुए गैर परम्परागत क्षैत्र में फलो सब्जियों एवं पुष्पों सहित अन्य बागवानी फसलों के संबंध में नवाचार और रूपान्तरण हेतु कोई कदम उठाय गयें हैं। यदि हा तो तत्सबंधी ब्यौरा क्या है। और मिषन के अन्तर्गत प्राप्त कि गई उपल्पब्धिया का राजस्थान सहित राज्य वार ब्यौरा क्या हैं?
सांसद पटेल के प्रष्न का जबाब देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने बताया कि समेकित बागवानी विकास मिशन एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है जिसका कार्यान्वयन 2014-15 से किया गया। (एमआईडीएच) का मुख्य उद्देश्य फलों, सब्जियों, कंदमूल, फसलों, मशरूम, मसाला, फूलों, सुगंधित पौधों, नारियल, काजु, कोको, बाॅस को कवर करते हुए बागवानी क्षेत्र का समग्र विकास है (एमआईडीएच) में मंत्रालय की चल रही मिषना/योजनाओं राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों के लिए बागवानी मिशन (एचएमएनईएच) राष्ट्रीय कृषि वानिकी बाॅस मिषन (एनएबीएम) राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) नारियल विकास बोर्ड (सीडीबी) और केंद्रीय बागवानी संस्थान (सीआईएच) नागालैंड को शामिल किया गया है (एमआईडीएच) के तहत सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को शामिल किया जाता है।
कृषि राज्य मंत्री ने बताया एमआईडीएच के तहत गुणवताप्रद बीज और पौधरोपण सामग्री के उत्पादन के लिए नर्सरियों, टिष्यू कलसर यूनोटो कि स्थापना किया जाना एवं क्षैत्र विस्तार अर्थात फलो, सब्जियों फूलों के लिए फलोद्यानों तथा बागानों कि स्थापना करना उनके साथ-साथ अनुत्पादक पुराने और जीर्ण फलोद्यानों का पूनरूद्वार करना सरंक्षित खेती अर्थात उत्पादकता में सुधार करने व बैमोसम उच्च मुल्य कि सब्जियों एवं फूलों को उगाने के लिए पोली हाउस, ग्रीन हाउस का निर्माण, जैविक खेती और प्रमाणिकरण, जलसंसधान और पनधारा प्रबंधन का सर्जन और परागन के लिए मधुमखी पालन एवं बागवानी यंत्रीकरण तथा फसलोपरांत और विपणन अवसंरचना का निमार्ण करना आदि शामिल हैं। एमआईडीएच के तहत राजस्थान के 24 जिले शामिल हैं।
कृषि राज्य मंत्री पुरूषोत्तम रूपाला ने कहा कि एमआईडीएच के तहत ऋण संबद्ध पाष्र्वांत राज सहायता फसलोपरांत अवसंरचना जैसे शीत भण्डारण, पैक हाउस, पकाई कक्ष, प्याज भण्डारण आदि के निमार्ण के लिए उपलब्ध हैं। इन अवसंरचना इकाईया का राजस्थान राज्य में शीत भण्डारण की संख्या 27 है जिसकी क्षमता 115390 एमटी हैं, व पकाई कक्ष 14, पैक हाउस 358, समेकित पैक हाउस 3 है तथा कम लागत वाली प्याज भण्डारण 4338 एमटी है।
कृषि राज्य मंत्री ने कहा कि एमडीआईएच के तहत राजस्थान राज्य में क्षैत्रिय विस्तार 151761 हैक्टयर, पनरूद्वार 5428 है0, सरंक्षित खेती 8531 है0, जैविक खेती 8408 है0, नर्सरी की सं0 135 है एवं जलसंसाधन की सं. 3135, फसलोप्रान्त प्रबंधन की सं. 4905 तथा कुल 19 मंडी है। तथा जलवायु परिर्वतन को देखते हुए गैर परम्परागत क्षैत्र में फलो सब्जियों एवं पुष्पों सहित अन्य बागवानी फसलों के संबंध में नवाचार जलवायु परिर्वतन के कारण सुनातियों का सामना करने के लिए भारतिय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने फसलो पर जलवायु परिर्वतन के प्रभाव का शमन करने के लिए कदम उठाय हैं और एक परियोजना नामतः राष्ट्रीय कृषि जलवायु सहय नवाचार (एनआईसीआरए) का कार्यान्वयन किया हैं।


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DesertTimes.in

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