किसानों के विकास से ही देश का विकास सम्भवन- अयन्नपात्रुडू

कृषि एवं ग्राम विकास के सम्मेलन में बोले वक्ता
आबूरोड़ । भारत देश किसानों का देश है आज भी हमारे देश की तकरीबन 70 प्रतिशत आबादी गॉंवों में रहती है जो कृषि पर निर्भर है। यदि किसान का विकास नहीं होगा तो गॉंव का विकास नहीं होगा और यदि गॉंवों का विकास नहंी तो देश का विकास सम्भव नहीं हैं। उक्त उदगार आन्ध्र प्रदेश के सडक़ परिवहन एवं निर्माण मंत्री चिंतकालया अयन्नापात्रुडू ने व्यक्त किये। वे ब्रह्माकुमारीज संस्था के शांतिवन में आयोजित कृषि एवं गा्रम विकास सम्मेलन के समापन सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अभी भी हमारे देश में छोटे और मझोले किसानों की आर्थिक हालात ठीक नहीं है। जिसके कारण वह प्रर्याप्त कृषि नहीं कर पाता है। यही कारण है कि किसान आत्महत्या कर लेता है। इसलिए सरकारों तथा राजनीतिज्ञों को चाहिए कि वे किसानों की तरक्की के लिए बेहतर प्रयास करे। जिससे हमारे देश के किसानों का विकास हो। ब्रह्माकुमारीज संस्थान के ग्राम विकास प्रभाग ने जिस तरह से सभी प्रदेशों में अभियान निकालकर किसानों में जागृति ला रही है इसके साथ ही सामाजिक कुरीतियों के प्रति भी जागरूकता ला रही है।कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज संस्था के कार्यकारी सचिव बीके मृत्युंजय ने कहा कि जब गॉंव के लोग स्वच्छ और स्वस्थ होंगे तब हमारा देश स्वच्छ और स्वस्थ होंगे। इसके लिए किसानों के मन को साफ कराने की जरूरत है। क्योंकि आज भी ग्रामीण लोगों के मन में रूढ़ीवादी परम्परा और अन्धविश्वास हावी है। इसलिए राजयोग ज्ञान के जरिये हमें उसे जीवन जीने की ओर प्रेरित करना है। ज्ञान सरोवर की निदेशिका बीके डॉ निर्मला ने कहा कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है इसलिए किसानों के विकास से देश का विकास होगा। समारोह में ग्राम विकास प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके सुमन्त ने कहा कि यह प्रभाग लगातार गॉंवों गॉंवों में जाकर लोगों को कृषि, जैविक एवं यौगिक खेती के लिए प्रेरित कर रहा है। ग्राम विकास प्रभाग के वरिष्ठ सदस्य बीके राजेन्द्र, कोल्हापुर की प्रभारी बीके सुनन्दा ने कहा कि महाराष्ट्र में किसानों की स्थिति ठीक नहीं थी परन्तु राजयोग के ध्यान और ज्ञान के प्रभाव से उनके अन्दर इस तरह की परिस्थितियों से निबटने में कारगर साबित हो रहा है। इस अवसर पर भीनमाल की बीके गीता ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
राजयोग ध्यान का भी प्रशिक्षण: चार दिनों तक चलने वाले इस महासम्मेलन में राजयोग ध्यान का भी किसानों को प्रशिक्षण दिया गया ताकि वे रूढि़वादी परम्पराओं से बाहर निकल सके। इसके साथ ही उन्हें शारीरिक व्यायाम का भी प्रशिक्षण देते हुए जैविक तथा यौगिक खेती करने के लिए प्रेरित किया गया।


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