बालगृहों के विकास के लिए भावनात्मक जुड़ाव की दरकार -न्यायाधिपति संदीप मेहता

जोधपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति संदीप मेहता ने कहा कि बाल गृहों में रह रहे बच्चों के विकास के लिए भावनात्मक जुड़ाव द्वारा सहयोग करना आवश्यक है। वे मारवाड़ क्लब में आयोजित वात्सल्य कार्यक्रम में बोल रहे थे। जिला कलक्टर डा. रविकुमार सुरपुर की इस सोच को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम से समान सोच रखने वाले व्यक्तियों, समूहों व संस्थाओं को एक प्लेट फॅार्म पर आने को प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने कहा कि देखभाल केवल वित्तीय राशि से नहीं होती बल्कि व्यक्तिगत जुड़ाव से होती है। उन्होंने कहा कि अगली बैठक से पहले बालगृहों के विकास के लिए इस प्लेटफॅार्म द्वारा विभिन्न सहायता रूपी कार्य कर न केवल जिले के लिए वरन् राज्य में एक उदाहरण स्थापित किया जाना चाहिए। जिला कलक्टर डा. रविकुमार सुरपुर ने कहा कि इन्टीग्रेटेड चाइल्ड प्रेटेक्शन स्कीम के तहत विभिन्न वर्गो के बच्चों की विभिन्न संस्थाओं में देखभाल की जा रही है। इसी को आगे बढाते हुए वात्सल्य कार्यक्रम का आयोजन कर जिले में अवस्थित बाल गृहों के विकास व उसमें आवासित बच्चों का विकास किया जा रहा है। जिला कलक्टर ने कहा कि जिले में दस बाल देखभाल संस्थान कार्यरत है जिसमें लगभग 274 बच्चों की देखभाल की जा रही है। इन गृहों में रह रहे बच्चों के साथ भावनात्मक जुड़ाव को बढाने के लिए व उन्हें आत्मीयता प्रदान करने के लिए उनके साथ त्यौहारों, विशेष उत्सवों, जन्म दिवस आदि विशेष दिवसों पर उनके लिए खास आयोजन किया जा सकता है। साथ ही खेलकूद सुविधाएं विकसित कर, लाइब्रेरी का विकास कर, संगीत प्रशिक्षकों की व्यवस्था कर, टयूसन की सुविधा उपलबध करवाकर इन बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास भी किया जा सकता है।।

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DesertTimes.in

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