संदिग्ध बाज के साथ मिले सामान की होगी जांच

– एफएसएल लैब को भेजी जायेंगी सभी वस्तुएं
श्रीगंगानगर। जिले में केसरीसिंहपुर थाना क्षेत्र में सीमावर्ती चक 1 वी में विगत शनिवार को मिले एक संदिग्ध बाज के साथ बंधे हुए इलेक्ट्रोनिक सामान की विधिविज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में जांच करवाई जायेगी। इस सामान को जयपुर में स्थित एफएसएल को भेजा जा रहा है। इस बाज के दोनों पैरों में चार छल्ले डाले हुए थे। उसके पंखों के नीचे एक ट्रांसमीटर, ड्राई बैंटरी सैल व एक माइक्रो चिप बंधी हुई थी। छल्लों पर दो नम्बर लिखे हैं,जिनके आगे यूईए लिखा हुआ है। इस बाज को पुलिस ने बाद में वन्य जीव विभाग के सुपुर्द कर दिया था, जो उसकी देखभाल कर रहा है। इस बाज को भी बीकानेर स्थित विभाग के जन्तूआलय को भेजा जायेगा। पुलिस ने बताया कि बाज के साथ मिले ट्रांसमीटर पर छोटा सा एंटीना भी लगा हुआ था। इसी तरह यूईए के आगे लिखे हुए नम्बर, किन्हीं मोबाइल के नम्बर प्रतीत हो रहे हैं। यहां यूईए का मतलब संयुक्त अरब अमीरात माना जा रहा है। जानकार लोगों का कहना है कि अरब देशों के शेख बाजों को पालने के
साथ-साथ उन्हें लम्बी दूरी की उड़ान (रेस) के लिए प्रशिक्षित करवाते हैं। ऐसे प्रशिक्षित बाजों की लम्बी उड़ान के वे मुकाबले करवाकर उनकी जीत-हार पर बडी-बड़ी रकमें लगाते हैं। बाज उड़कर कितनी दूर गया, यह जानने के लिए वे उसके पैरों में निशानी के तौर पर छल्ले डलवाते हैं और एंटीना युक्त ट्रांसमीटर लगवा देते हैं। यह ट्रांसमीटर साथ में लगते हुए ड्राई बैंटरी सैल से चलते हैं। इनके साथ लगी हुई चिप से बाज की उड़ान का डेटा फीड होता है। एंटीना के जरिये यह डेटा बाज के प्रशिक्षक तक पहुंचता है, जिससे ही पता चलता है कि बाज ने कितनी दूर की उड़ान भरी है। इसी डेटा से ही दांव पर लगी हुई रकम की हार-जीत होती है। कईं बार ऐसे प्रशिक्षित बाज रास्ता भटककर दूसरे देशों में पहुंच जाते हैं। पुलिस ने यहां मिले बाज को लगभग ऐसा ही प्रशिक्षित बाज माना है। हालांकि पुलिस का यह भी कहना है कि जब तक एफएसएल की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक पूरे यकीन से यह सब नहीं कहा जा सकता। दूसरी ओर खुफिया एजेंसियां अपने स्तर पर छल्लों पर लिखे हुए नम्बरों की हकीकत जानने के साथ-साथ वे भी एफएसएल की रिपोर्ट आने का इंतजार करेंगी।


correspondent

Sanjay Sethi

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