विश्व भर में मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण होगा…जानने के लिए क्लिक करे

6.5 करोड़ लोग सीओपीडी से ग्रसित: डॉ. अग्रवाल शिविर में 25 मरीजों की स्पाइरोमीटर से की जांच जोधपुर। विश्व सीओपीडी दिवस पर कमला नेहरू वक्ष चिकित्सालय के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ आचार्य डॉ. केसी अग्रवाल ने अपने निवास स्थान पर सीओपीडी रोग के परामर्श एवं निवारण का श्वास नामक शिविर का आयोजन किया। इस अवसर पर शिविर में 25 मरीजों की नि:शुल्क स्पाइरोमीटर द्वारा जांच की गई। उन्होंने बताया किसीओपीडी फेफड़ो की एक गंभीर बीमारी है जिसमें फेफड़ों में हवा ले जाने वाले और हवा बाहर निकालने वाले मार्ग अथवा नालियों में रूकावट आती है। सीओपीडी के दो मुख्य प्रकार है जिसमें ब्रोन्काईटिस में श्वास नलियों के अन्दर की सतह में सूजन रहती है एवं भारी मात्रा में मौटा गाढ़ा कफ जमा होता है जिससे सांस लेने में दिक्कत आती है। वहीं एम्फीसिमा में वायुकोष के बीच की दीवार को नुकसान होता है एवं दीवार नष्ट हो जाती है जिससे इन वायुकोष की जगह पर कम और छोटे एयरवे बनते है ऐसा होने पर फेफडे की वायु का आवागमन घट जाता है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्वभर में 6.5 करोड़ लोग सीओपीडी से ग्रसित है। अनुमान दर्शाता है कि 2030 में सीओपीडी विश्व भर में मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण होगा। उन्होंने बताया कि इसका निदान बीमारी के लक्षणों द्वारा एक्सरे एवं श्वास की गति नापने के लिए जिसे स्पाइरोमीटरी कहते है के द्वारा निदान किया जाता है। चिकित्सक की सलाह से ब्रोंको डायलेटर-बीटा टू एगोनिस्ट एवं मस्किीरीनीक ब्लोकर दवाई दी जाती है। धूम्रपान सीओपीडी का मुख्य कारण है इसलिए इसे त्यागना जरूरी है। धू्रमपान छोडऩे से फेफड़ो का हो रहा अधिक नुकसान रोका जा सकता है। इसके साथ ही स्वच्छता बनाये रखना जरूरी है। घर को हर संभव कोशिश करे स्वच्छ बनाये रखने की, धूल से मुक्त रखें। अपने हाथ बार-बार और ध्यान से धोंये। वायु प्रदूषण, धूल, पालतू प्राणी, एयरोसोल स्प्रे, रसायन, धुंआ, आग, तापमान और नमी में तीव्र स्थिति से दूर रहे।

correspondent

Gulam Mohammad

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