‘मास योगा’ का रिकॉर्ड : मंत्र ध्वनि के साथ 6 हजार ने किया सूर्य नमस्कार

— सेंट्रल एकेडमी के 6000 से अधिक विद्यार्थियों व शिक्षकों ने सूर्य नमस्कार कर बनाया रिकॉर्ड, बाल मेला 14 को 
जोधपुर। सेन्ट्रल एकेडमी संस्था के शैक्षणिक व सामाजिक सरोकारों के चालीस वर्ष का सफर पूर्ण होने पर आज से अनेक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हुआ। मास योगा समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि जोधपुर महापौर घनश्याम ओझा ने बच्चों का मार्गदर्शन करते हुए योग द्वारा ध्यान केन्द्रित कर जीवन में सफल होने का गुरूमंत्र दिया।
मंत्र ध्वनि के साथ सूर्य नमस्कार
सेन्ट्रल एकेडमी की प्राचार्या डॉ. शशिसिंह ने बताया कि कार्यक्रम की पहली कड़ी में संस्था के विद्यार्थियों ने मंत्र ध्वनि के साथ सूर्य नमस्कार किया और ‘मास योगा’ का रिकॉर्ड बनाया। प्रदेश में संभवतया यह पहला अवसर है, जब 6000 से अधिक विद्यार्थियों व शिक्षकों ने एक साथ देश व समाज को स्वस्थ रहने का सन्देश दिया। उन्होंने बताया कि सेन्ट्रल एकेडमी संस्था के चार दशक पूर्ण होने पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की कडी में 14 नवम्बर को संस्था की सभी शाखाओं में बाल मेले का आयोजन किया जाएगा।
संस्था की 40 वीं वर्षगांठ पर आयोजन
इस क्षण की साक्षी बनी सेन्ट्रल एकेडमी संस्था की बीजेएस शाखा। जहां भोर की पहली किरण के साथ ही देश के भावी कर्णधारों ने योग के विभिन्न आसनों व प्राणायाम की मन-मोहक प्रस्तुति दी और सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। नन्हे-मुन्नों ने किए ताड़ासन, वृक्षासन और वीर भद्रासन- सेन्ट्रल एकेडमी संस्था की 40 वीं वर्षगांठ पर संस्था द्वारा ‘मॉस योगा‘ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
वार्म अप एक्सरसाईज
संस्था पीआरओ कुमुद गौड़ ने बताया कि सुबह 8 बजे बीजेएस स्थित स्कूल परिसर में संस्था की पाली एवं जोधपुर स्थित शाखाओं के लगभग 5000 व पाली शाखा के 700 विद्यार्थियों व 1000 से अधिक शिक्षकों ने एक साथ योग किया। ‘गुर्रू ब्रह्म गुर्रू विष्णु की प्रार्थना के साथ प्रतिभागियों को पहले विभिन्न प्रकार की वार्म अप एक्सरसाईज करवाई गई। तत्पश्चात अगली कड़ी में सूर्य नमस्कार व विभिन्न आसन कराए गए।
किया योग बताया अर्थ
इस दौरान छात्र-छात्राओं ने खडे रहकर करने वाले आसनों में ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, वीर भद्रासन आदि तथा बैठकर करने वाले आसनों में वज्रासन, ऊष्ट्रासन, शशांकासन, पर्वतासन,पश्चिमोतानासन, बटरलाई, योग मुद्रा आदि कराए। बाद में लेटकर करने वाले आसनों में मत्स्य आसन, सेतुबन्ध आसन, सर्वांगआसन, हलासन, भुजंगासन, नौकासन, पवनमुक्तासन, अद्र्धधनुरासन, शलभासन, शवासन व प्राणायाम में भ्रामरी व अनुलोम-विलोम तथा ओमकांर की क्रिया कराई। इस अवसर पर अध्यापिकाओं ने योग के इतिहास, अर्थ व महत्व पर प्रकाश डाला।


correspondent

anand m vasu

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