सूर्योदय के साथ ‘समानुभूति’ सूर्यनगरी में रवि को

— पांच ललित कलाओं में से चार कलाओं के रचनाकार एक साथ, एक भाव की अनुभूति करते हुए कलाओं की करेंगे प्रस्तुति जोधपुर । सूर्यनगरी में रविवार को फ़तेह सागर के किनारे रामानुज कोट मंदिर के छत बगीचे में सूर्योदय के साथ ललित कला जगत के एक अनूठे कार्यक्रम 'समानुभूति' कार्यक्रम का आयोजन होगा । इस कार्यक्रम में कुल पांच ललित कलाओं में से चार कलाओं संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला और साहित्य के रचनाकार एक साथ, एक भाव की अनुभूति करते हुए अपनी कलाओं की एक साथ प्रस्तुति करेंगे । सृजना के सचिव डॉ हरीदास व्यास ने बताया कि रविवार की सुबह सृजना, सुर, श्रीवैष्णव संगीत महाविद्यालय, जोधपुर तथा कल्प चित्रकला परिषद के कलाप्रेमी संयुक्त रूप से पाश्चात्य सौंदर्य शास्त्र की एक परिकल्पना को साकार करेंगे । इसके अनुसार अनुभूति के चरम स्तर पर पहुंचने के बाद सारी ललित कलाएं परस्पर एकाकार हो जाती हैं । अनुभूतियों के इस अनूठे जगत की संगीत रचना पंडित राजेन्द्र वैष्णव प्रात:कालीन शास्त्रीय रागों के द्वारा करेंगे । तबले पर संगत कपिल वैष्णव करेंगे । सितार पर ख्याति प्राप्त कलाकार सलमान खान होंगे और सारंगी पर साथ शाहरुख खान देंगे । शास्त्रीय राग-रागिनियों के इन समवेत स्वरों की अनुभूति को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त यतीश कासरगोड, केशव वरनोती, प्रदीप्त किशोर दास जैसे चित्रकारों के साथ अनेक युवा चित्रकार भी अपने कैनवास पर पेंटिंग की शक्ल में उकेरेंगे, जब कि मूर्तिकार संगीत की इस अनुभूति को मूर्ति की शक्ल में ढालेंगे और इन्हीं के साथ सूर्यनगरी के कलमकार संगीत की इस गहन अनुभूति को शब्दों में ढाल कर कविता या शब्द-चित्रों का रूप देंगे । इस अवसर पर सितार और सारंगी पर सीकर घराने की एक विशेष बंदिश की भी प्रस्तुति होगी । सृजना अध्यक्षा सुषमा चौहान ने कहा कि यह संयुक्त आयोजन जोधपुर के ही नहीं बल्कि देश के कला-इतिहास का एक नया अध्याय होगा जहाँ चार ललित कलाएं समवेत रूप से अभिव्यक्त होंगी . इस आयोजन में सूर्यनगरी का कोइ भी चित्रकार, मूर्तिकार, साहित्यकार भाग ले सकता है . इस "समानुभूति" आयोजन की कलाकृतियों को, शब्द-रचनाओं को भविष्य में पुस्तक रूप में प्रकाशित करने की भी योजना है . उन्होंने कहा कि गत वर्ष के फरवरी माह में पहली बार इन चार ललित कलाओं की 'समानुभूति' का प्रयोग किया गया था . उस कार्यक्रम की सफलता और उपस्थित कलाकारों तथा दर्शकों के अद्भुत अनुभवों के कारण इस कार्यक्रम को प्रतिवर्ष करने का निर्णय लिया गया था . उन्होंने बताया कि 'सृजना' सूर्यनगरी की कला समर्पित संस्थाओं के साथ मिल कर इस "समानुभूति "कार्यक्रम को जोधपुर की विशिष्ट पहचान के रूप में स्थापित करना चाहती है . जोधपुर की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध एवं जनप्रिय बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम में सभी के लिए प्रवेश निश्शुल्क है .

correspondent

anand m vasu

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