बीएसएफ ने ऐसे खोली हाशम खां की पोल

– पाकिस्तान मेें रिश्वत देकर बनवाये थे फर्जी पासपोर्ट
श्रीगंगानगर । हाशम खान ने कबूल किया है कि वह जाली पासपोर्ट के जरिये पंजाब से लगते बाघा-अटारी बॉर्डर पर अन्र्तराष्ट्रीय चैक पोस्ट से होकर भारत आया था। बीएसएफ के राजस्थान फ्रंटीयर महानिरीक्षक अनिल पालीवाल ने जोधपुर स्थित अपने मुख्यालय में प्रैस वार्ता कर खुलासा किया था कि हाशम खान, जो कि सन 1990 में जैसलमेर बॉर्डर के इलाके से अवैध रूप से सीमा पार कर पाकिस्तान चला गया था, वह 3 अप्रैल 2017 को अटारी (अमृतसर, पंजाब) के रास्ते आया था। इसके लिये हाशम खान ने फर्जी पासपोर्ट एवं फर्जी नाम का इस्तेमाल किया था।
सोमवार को संयुक्त जांच एजेन्सी केन्द्र जैसलमेर में हाशम खान ने कबूला की वह 3 अप्रैल 2017 को वह जाली पासपोर्ट के जरिये बाघा-अटारी बॉर्डर पर अन्र्तराष्ट्रीय चैक पोस्ट होते हुए भारत आया था। उसने अपना फर्जी पहचान पत्र सन 2003 में गुलाम मुस्तफा के नाम से पाकिस्तान में बनवाया था। इसके लिये उसने वहां एक हजार की पाक मुद्रा रिश्वत के तौर पर दी थी । सन 2010 में हाशम खान ने फतेह खान बलूच, निवासी मीरपुरखास, पाकिस्तान की मदद से उसने गुलाम मुस्तफा के नाम से नकली पासपोर्ट बनवाया, जो कि बारीश मे भीगने के कारण खराब हो गया था। इस नकली पासपोर्ट के लिये हाशम खान ने फतेह खान को 40 हजार की पाक मुद्रा दी थी। पहले पासपोर्ट की अवधि समाप्ति पर हाशम खान ने वर्ष 2015 में पुन: फतेह खान की मदद से नया फर्जी पासर्पार्ट बनवाया, जिसके लिये उसने 5000 की पाक मुद्रा फीस के तौर पर एवं 5000 पाक मुद्रा बतौर रिश्वत के रूप मे दी।


correspondent

Sanjay Sethi

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