सरकार के खिलाफ मीडिया का मोर्चा

— मीडिया और लोकतंत्र का गला घोंटने वाले विवादित विधेयक का विरोध 
— समाचार पत्र के एक समूह का सरकार की खबरों पर ताला
— काले कानून के विरोध में एक दैनिक हिन्दी समाचार पत्र के संस्थापक के खरे लेकिन नुकिले संपादकीय को देशभर में सराहा जा रहा है
जयपुर । काले कानून के विरोध में सरकार के खिलाफ मीडिया का विरोध मुखर होता जा रहा है । राजधानी सहित राज्य भर में पत्रकारों में इस काले कानून को लेकर रोष है कि सरकार दोषियों को बचाने के लिए मीडिया पर नियंत्रण कर रही है ।
सरकार की खबरों पर ताला
इस काले कानून के खिलाफ एक दैनिक हिन्दी समाचार पत्र ने अभियान तक छेड़ दिया है । मीडिया और लोकतंत्र का गला घोंटने वाले विवादित विधेयक को वापस नहीं लेतींं, तब तक यह हिन्दी दैनिक समाचार पत्र उनका बहिष्कार करते हुए उनके या उनसे संबंधित किसी भी समाचार का प्रकाशन नहीं करेगा । इस समाचार पत्र के संस्थापक के नुकीले संपादकीय को देश भर में सराहा जा रहा है और काले कानून के खिलाफ मीडिया के साथ अभिनेताओं और जनप्रतिनिधियों सहित जनता के स्वर भी मुखर हो रहे हैं ।
यह है काला कानून
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने पिछले महीने दो विधेयक- राज दंड विधियां संशोधन विधेयक, 2017 और सीआरपीसी की दंड प्रक्रिया सहिंता, 2017 पेश किया था । इस विधेयक में राज्य के सेवानिवृत्त एवं सेवारत न्यायाधीशों, मजिस्ट्रेटों और लोकसेवकों के खिलाफ ड्यूटी के दौरान किसी कार्रवाई को लेकर सरकार की पूर्व अनुमति के बिना उन्हें जांच से संरक्षण देने की बात की गई है । यह विधेयक बिना अनुमति के ऐसे मामलों की मीडिया रिपोर्टिंग पर भी रोक लगाता है ।


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