मारवाड़ ने दिखाई पानीदार बने रहने की व्यवस्था

पानी और हम विषय पर जलपुरूष राजेन्द्र सिंह राणा का हुआ व्याख्यान
बाड़मेर। सामुदायिक जल प्रबंधन विकेन्द्रीकरण द्वारा मारवाड़ के लोगों ने कम वर्षा में भी पानीदार बने रहने की एक सनातन स्थाई जल व्यवस्था बनाई थी जिसके कारण दुनिया का कम वर्षा वाला क्षेत्र होने के बावजूद पानीदार बना रहा। यह बात मैगसेसे एवार्डी एवं पानी के नोबल पुरस्कार के रूप में जाना जाने वाला स्टाकहाम वाटर एवार्ड से पुरस्कृत राजेन्द्र ंिसंह राणा ने पानी और हम विषय पर बोलते हुये शनिवार को बाड़मेर के भगवान महावीर टाॅऊन हाॅल में कही । सोसायटी टू अपलिफ्ट रूरल इकोनोमी (श्योर) संस्था द्वारा पद्म श्री मगराज जैन स्मृति में व्याख्यान श्रृंखला में यह तीसरा व्याख्यान का आयोजन था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या मंे किसान, पशुपालक, लोंक संगीतकार, संस्कृति कर्मी,सामाजिक कार्यकर्ता , प्रबुध नागरिक गण एवं नौजवानो ने भाग लिया।

सिंह ने कहा कि जल का संकट भूजल के दोहन के कारण विकराल होता जा रहा है। भारत में आजादी के बाद जितने क्षेत्र में जल का संकट होता था । अब इससे दस गुणा ज्यादा का क्षेत्र अकाल और जल संकट से जुझ रहा है और दूसरी तरफ बाढ़ का क्षेत्र भी बढ़ता जा रहा है। उन्होने कहा कि अकाल और बाढ़ का साथ-साथ आना जलवायु परिवर्तन के अनुकूल जल प्रबंधन का व्यवस्था का अभाव हेै।
सिंह ने कहा कि भारत मंे जहां-जहां बदलती जलवायु को समझकर सामुदायिक जल प्रबंधन के विकेन्द्रकरण का काम हुआ है। जलवायु परिवर्तन के अनुकूल प्रकिया शुुरू की , वहां सूखी और मृत नदियां पुनःजीवित हो गई। नदिया फिर बहने लगी ंलोगों का जलसंकट दूर हो गया। उन्होने कहा कि तरूण भारत संघ का राजस्थन एवं महाराष्ट्र का अनुभव यह बताता है कि भारतीय समाज मंे अभी भी जल संरक्षण की वह समझ ,शक्ति और साधन बचे हुए है जिनको जोड़कर भारत को जल संकट से मुक्त बनाया जा सकता है।
सिंह ने कहा कि अरवरी, भगानी नदी के हमारे अनुभव बाड़मेर सहित दुनिया के लोगों के साथ भी बांटे गये । बत्तीस साल पहले और आज के परिवर्तन का प्रत्यक्ष दर्शन करवाया गया । जल संकट से बचने के लिये डांग और मत्स्य क्षेत्र के सामुदायिक जल विकेन्द्रकृत प्रबंध व्यवस्था के अनुभव बांटे गये।
सिंह ने कहा कि भारत को जल संकट से बचाने के लिए नदियों को जोड़ने से काम नहंी होगा। उन्होने कहा कि नदियों को समाज से जोड़कर नदियों के पुनजीवित करने के जीवंत अनुभवों को अपनाने से जल संकट से मुक्ति मिलेगी । राणा ने कहा कि नई पीढ़ी को जल संकट से मुक्ति के लिऐ आगे आने की जरूरत है। सिंह ने कहा कि धरती का बुखार बढ़ रहा है। फसल का पेटर्न एवं बारिश के पेटर्न को साथ जोड़ने की जरूरत है। उन्होने कहा कि ज्ञान से ज्यादा आचार, व्यवहार और संस्कार जरूरी हैै ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का मुकाबला कर सकें।सिंह ने पद्मश्री मगराज जैन के साथ अपने संबधो को बताया । उन्होने कहा कि जैन ने मारवाड़ के युवाओं के लिए चेतना और बदलाव के काम से जोड़ने के लिऐ अपनी जिंदगी लगा दी उन्होने कहा कि श्योर संस्था ने पदमश्री मगराज जैन की स्मृति को बनाये रखने से उनके विचारो को आज के युवाआंे को सामाजिक कार्यो को करने की प्रेरणा मिलती रहेगी। उन्होने ने कहा कि दूरस्थ विषम इलाके में पांचवे -छठे दशक से लगातार कार्य करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था।
ंिसह ने कहा कि बाड़मेर जल साक्षरता का पुरोधा बनें। शक्ति और संकल्प के साथ जुड़े ताकि बाड़मेर जल साक्षरता का महत्वपूर्ण केन्द्र बने । उन्होने कहा कि पदम श्री मगराज जैन बाड़मेर को सुद्वढ़ आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के जरिये स्थानीय ज्ञान, कौशल के जरिये बाड़मेर को तरक्की के रास्ते पर ले जाने के लिए जैन ने अपना जीवन लगाया । उन्होने कहा कि जैन की दृष्टि , विचार को आगे बढ़ायें ।
सिंह ने कहा कि दुनिया बाड़मेर से सीखे कि कम पानी मंे लोग कैसे जीते है, कैसे संरक्षित रखते है, कैसे शांति और सद्भावना से रहते है। बाड़मेर जल सरंक्षण का जगत गुरू बनें ।
सिंह ने कहा कि बाड़मेर में उनका तीसरा दौरा है। उन्होने कहा कि मगराज जी ने वर्ष 1984 मंे बाड़मेर राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का आयोजन किया और उसमें भागीदारी का मौका मिला था । उन्होने ने कहा कि ऐसी शख्सियत हम सभी के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
विनोद विटठल ने इस अवसर पर संबोधीत करते हुए कहा कि पानी बचाने का मतलब हमारे अंदर की सामुदायिकता बचाने का। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिव प्रसाद मदान नकाते ने कहा कि पद्मश्री मगराज जैन के कार्यो को जारी रखकर उन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत हेै। जिला कलक्टर ने कहा कि एक व्यक्ति जीवन में कितने प्रकार से विविध कार्य कर सकते है, जैन ने अपने जीवन में करके दिखाया। उन्होने साख का निर्माण किया। गरीबांे के लिये सोचा कार्य किया । बाड़मेर को दृष्टि दी, विचार दिया, शक्ति दी। उन्होने कहा कि श्योर संस्था प्रशासन के साथ मिलकर समाज कार्य को गति दे रही है। कार्यक्रम के आरंभ में श्योर संस्था के सचिव आनन्द राज जैन अध्यक्ष मदनलाल सिंहल, उपाध्यक्ष रिखबदास मालू, जेठमल जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम संयोजक लता कच्छावा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन मुकेश पचैरी द्वारा किया गया।
पानी पर लोकगीतों की प्रस्तुति:-
अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक संगीतकारों ने पानी पर लोक गीतों की भाव-भरी प्रस्तुतियां दी । लोक संगीतकार गाजी खां, अनवर खां बहिया, गफूर खां, फकीरा खां, धोधे खां, कुर्बान खंा, खेताखां, जोगा खां, सलामतखां, दायरा खां, सहित अनेक कलाकारों ने झिरमिर बरसे मेह, बरसालो के साथ-साथ केसरिया बालम एवं अकाल संबधी गीतों को प्रस्तुत किया।ं झिरमिर बरसे मेह , बरसालो गीत राग सारंग में प्रस्तुत किया।
कनाडा के मार्क का सुझाव-बाड़मेर का माउण्टेन बने मगराज जी के नाम
कनाड़ा के आये मार्क एल.टेकफमेन ने पद्म श्री मगराज जैन स्मृति व्याख्यान एवं स्मृति सम्मान समारोह मंे शिरकत की और इस अवसर पर कहा कि पद्म श्री मगराज जैन ने अपने कार्यो और मूल्यों से देश को महान विरासत दी है। उन्होने कहा कि उन्हे दो वर्ष जैन के साथ काम करने का मौका मिला। मार्क ने कहा कि जैन भारत के महान नेता,दूरदर्शी थे । उनके द्वारा स्थापित श्योर संस्था ने लोगो को आर्थिक रूप से एवं व्यक्तिगत रूप से उन्नयन मंे मदद की है।
मार्क ने कहा कि भारत पाक विभाजन के समय से ही जैन देश के वंचित वर्ग के लिये काम कर रहे थे। लोगो के जीवन और आत्म गौरव को बढ़ाने मंे उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होने कहा कि मूक बधिर के लिऐ विधालय का निर्माण करवाना, संचालित करना, उनका दूसरे लोगो की मदद करने के चरित्र को दर्शाता है। उन्होने कहा कि सोमाणियों की ढाणी के पास की पहाड़ी का नाम मगराज जैन माउण्टेन रख दिया जाये तो यह बाड़मेर एवं मगराज जैन एवं उनके परिवार का सम्मान होगा । उन्होने इस हेतु मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार को निवेदन किया और जिला कलेक्टर बाड़मेर को भी इस संबध में कार्यवाही का आग्रह किया।
इनका हुआ सम्मान
पद्मश्री मगराज जैन स्मृति सम्मान 2017 समारोह भगवान महावीर टाउन हाॅल में शनिवार को वाटरमेन राजेन्द्रसिंह राणा की प्रमुख उपस्थिति में जिला कलेक्टर शिव प्रसाद मदान नकाते के मुख्य आतिथ्य में किया गया। तीसरी बार आयोजित हुए सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रो में उल्लेखनीय कार्य करने वाली शख्शियतों का सम्मान किया गया। जल संरक्षण एवं कम पानी से शुष्क कृषि कार्य के लिये मालाराम गोदारा अरणियाली, धीरज कुमार बाडमेर, अशोक राजपुरोहित एवं बाबूलाल सोनी निवासी जूना मीठाखेडा को सम्मानित किया गया।
कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में कमलसिंह सोढा देदूसर, श्रीमती हरिया देवी भीम गांव बायतु ,पुनमाराम विश्नोई डेडावास गुडामालानी , भानुप्रताप सिंह केयर्न इण्डिया एवं पूनमाराम छीतर का पार बायतु को सम्मानित किया गया। हस्तशिल्प क्षेत्र में श्रीमती सूजीदेवी मिठडाउ को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिये सम्मानित किया गया। लोक-संस्कृति ,रंग कर्म एवं फिल्माकन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यो हेतु खींयाराम चैधरी सनावडा, कानंिसंह कोटडी, गफूर खांन मांगणियार झांपली, गाजी खांन हडवा, पुरूषोतम ख़त्री बाडमेर, मुकेश पचैरी एवं गोपीकिशन शर्मा को सम्मानित किया गया।
शिक्षा एवं चरित्र निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यो हेतु अमृतकौर बाडमेर , पुखराज गुप्ता बाडमेर एवं मौलाना ताज मोहम्मद खारची को सम्मानित किया गया। पत्रकारिता के उल्लेखनीय कार्यो हेतु शंकर गोली, रतन दवे, मुकेश मथराणी एवं कन्हेयालाल डलोरा को सम्मानित किया गया।
दिव्यांग प्रेरणा एवं दिव्यांग सशक्तिकरण के क्षेत्र उल्लेखनीय कार्यो हेतु नेत्रहीन सांवलाराम रडवा बाखासर एवं विनोद विठ्ल राज वेस्टपाॅवर भादरेश को सम्मानित किया गया। एकल नारी एव महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र उल्लेखनीय कार्यो हेतु सूश्री उमा कच्छावाह को सम्मानित किया गया।
कमजोर वर्ग का सशक्तिकरण के क्षेत्र उल्लेखनीय कार्यो हेतु भूराराम भील महाबार एवं उदाराम मेघवाल शिव को सम्मानित किया गया। इसी प्रकार संस्थागत कार्यो के सहयोग के लिये घनश्याम सोनी बाडमेर एवं बाबूसिंह सोंलकी महाबार को सम्मानित किया गया।
थार में पानी के जतन पर आधारित सीडी का विमोचन:-
श्योर द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनओं के तहत पानी पर आधारित किये गये कार्यो की सी.डी. का विमोचन मैगसैेस एवार्डी जल पुरूष राजेन्द्र ंिसंह राणा द्वारा किया गया । सीडी की पटकथा एवं स्वर डाॅ.बंशीधर तातेड़ परिकल्पना डाॅ.लता कच्छवाह, हनुमानराम चैधरी , संकलन सुनील राखेचा धीरज शर्मा द्वारा किया गया।


correspondent

DesertTimes.in

DesertTimes.in

%d bloggers like this: