जी हां हजूर! बचा रहेगा पेड़ खजूर

– जस्सासिंह मार्ग पर एकमात्र बचे पेड़ को बचाया गया
श्रीगंगानगर। शाश्वत सत्य है कि विकास आता है तो विनाश भी आता है। श्रीगंगानगर में नई धानमण्डी के पीछे वाले मार्ग पर कभी खजूर के पेड़ों की कतार हुआ करती थी। इसे खजूर वाला मार्ग के रूप में जाना-पहचाना जाता था। इस मार्ग को मिनी बाइपास के रूप में विकसित किया जाने लगा, तो यह विकास अपने साथ खजूर के पेड़ों के लिए विनाश भी लेकर आया। मार्ग का चौड़ीकरण किया गया। डिवाइडर वाली शानदार रोड पदमपुर मार्ग की ओर से बनाई जानी शुरू की गई। इन दिनों इस डिवाइडर रोड को बसंती चौक से सूरतगढ़ रोड नेशनल हाइवे से जोडऩे का काम शुरू किया गया है, जोकि कईं महीनों से अटका हुआ था। नगर विकास न्यास ने सूरतगढ़ रोड से बसंती चौक तक यह रोड बनाने के लिए काम तो शुरू करवा दिया, लेकिन बीच में जिन लोगों की कृषि भूमि या भूखण्ड आ रहे हैं, उनमें से करीब एक दर्जन लोग हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किये हुए हैं।

न्यास अध्यक्ष संजय महिपाल ने शुक्रवार को बताया कि यूआईटी इन मामलों में अदालतों में पूरी तरह से पैरवी कर रही है। जिन-जिन प्रकरणों में अदालत का स्थगन आदेश हटता जा रहा है, उन जगहों को न्यास अपने कब्जे में ले रहा है। इसी कारण ही सूरतगढ़ रोड से बसंती चौक तक के मार्ग पर वहीं-वहीं काम शुरू करवाया गया है, जहां किसी तरह की कोई अड़चन नहीं है। जमीन का स्वामित्त्व न्यास के पास ही है। जिन जगहों के मामले कोर्ट में चल रहे हैं, उन जगहों को छोड़ा जा रहा है। न्यास का पूरा प्रयास है कि सूरतगढ़ मार्ग को पदमपुर मार्ग से जोडऩे के लिए बनने वाला यह मिनी बाइपास जल्द से जल्द पूरा हो जाये, ताकि शहरवासियों के साथ-साथ नई धान मण्डी में उपज लाने वाले आसपास के किसानों को भी इसका लाभ मिल सके। धानमण्डी का एक गेट इसी मिनी बाइपास पर बना हुआ है।

जहां तक खजूर के पेड़ों की बात है, कभी यहांं इन पेड़ों की छटा ही निराली हुआ करती थी। खेतों के किनारे कतारों में खड़े यह पेड़ लोगों को आकर्षित करते थे। जबसे मिनी बाइपास का निर्माण शुरू हुआ और नगर विकास न्यास ने इस मार्ग से लगती कृषि भूमि पर से अतिक्रमणों को हटवाया, तो खजूर के कईं पेड़ इसकी बलि चढ़ गये। सिर्फ एक पेड़ ही बचा हुआ था, जो याद दिलाता रहता था कि कभी यह खजूर मार्ग हुआ करता था।

वार्ड के पूर्व पार्षद और कांग्रेस के शहर महामंत्री सुरेन्द्र स्वामी एडवोकेट ने बताया कि शुक्रवार को जब इस पेड़ को भी हटवाने का वक्त आया, तो सभी ने मिल-जुलकर निर्णय किया कि इस पेड़ को बचाया जाना चाहिए। यह पेड़ मिनी बाइपास की चौड़ाई में आ रहा था। इसको हटवाया जाना भी जरूरी था, लेकिन आसपास के लोग यह भी चाहते थे कि यह पेड़ जीवित भी रहे। लिहाजा जेसीबी मशीनों के जरिये इस पेड़ को बड़ी सावधानी से उखाड़ा गया और फिर उसे मिनी बाइपास की चौड़ाई से कुछ दूर ही इसे दोबारा लगा दिया गया। इसमें मोहल्ले के अनेक लोगों ने भी सहयोग किया।

एडवोकेट स्वामी ने कहा कि इस पेड़ को बचाये रखने के पूरे प्रयास किये जायेंगे। मोहल्ले के अनेक लोग इसमें सहयोग करने को तैयार हैं। यह पेड़ याद दिलाता रहेगा कि यह मिनी बाइपास कभी खजूर मार्ग हुआ करता था। लोगबाग इस पेड़ को देखते ही कहेंगे- जी हां हजूर, बचा हुआ है पेड़ खजूर।


correspondent

anand m vasu

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