विश्व विरासत जंतर-मंतर

— राजा सवाई जयसिंह ने बनवाया दुनिया का यूनिक डिजाइन — दिल्ली और जयपुर के जंतर मंतर शेष बचे, बाकी काल के गाल में समाए जयपुर । राज्य की धरोहर अब विश्व की धरोहर बन चुकी है । यूनेस्को की ओर से जंतर मंतर को विश्व विरासत का दर्जा देने के बाद इसकी महत्ता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ गई है । जयपुर के राजा सवाई जयसिंह को खगोल विज्ञान में गहरी दिलचस्पी थी, उन्होंने प्राचीन खगोलीय यंत्रों और जटिल गणितीय संरचनाओं के माध्यम से ज्योतिषीय और खगोलीय घटनाओं का विश्लेषण और सटीक भविष्यवाणी करने के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध अप्रतिम जंतर-मंतर वेधशाला का निर्माण कराया। इस वेधशाला का निर्माण कराने से पहले उन्होंने विश्व के कई देशों में अपने सांस्कृतिक दूत भेजकर वहां से खगोल-विज्ञान के प्राचीन और महत्वपूर्ण ग्रंथों की पांडुलिपियाँ मंगवाईं और उन्हें अपने पोथीखाने (पुस्तकालय) में संरक्षित कर अपने अध्ययन के लिए उनका अनुवाद भी करवाया। आज भी जयपुर की वेधशाला यानि जंतर मंतर में उपस्थित यंत्रों के द्वारा की गई गणनाओं के आधार पर यहां का पंचांग तैयार किया जाता है।

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