तेरे शहर में अजीब सी हवा है इन दिनों…

मुरारी गुप्ता

तेरे शहर में अजीब सी हवा है इन दिनों
माहौल तंग है रिश्ते जकड़े हुए से
शटरें खिंची हैं भरे बाजारों में
रुद्र कुटुम्ब उखड़ने लगा है

शिवालयों में महादेव खामोश है इन दिनों।
तेरे शहर में अजीब सी हवा है इन दिनों

न जाने क्या उग आया है दरो दीवारों पर
नींव की ईंटें दरकने लगी हैं
तस्वीर जो टंगी थी काबा की कभी
जगह से सरकने लगी है इन दिनों।
तेरे शहर में अजीब सी हवा है इन दिनों

शरबतों का रंग फीका सा क्यूँ हैं
तंदूर सारे ठंडे पड़ें हैं
रातों का नूर गुम सा गया है
गली, नुक्कड़, मोहल्ले चुप हैं
हर दर ओ दरवाजा उदास है इन दिनों।
तेरे शहर में अजीब सी हवा है इन दिनों


correspondent

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