एलोवेरा : बढ़ती मांग और व्यावसायिक खेती

— बढ़ती मांग के कारण कृषक व्यावसायिक रूप से इसकी खेती को अपना कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं — एलोवेरा में कई औषधीय गुण पाये जाते हैं जयपुर । पानी की समुचित व्यवस्था करके किसान अब एलोवेरा की खेती से समुचित लाभ कमा सकते हैं क्योंकि ऐलोवेरा की मांग बढ़ती जा रही है । बढ़ती मांग के कारण कृषक व्यावसायिक रूप से इसकी खेती को अपना कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं । अलग-अलग नाम ग्वारपाठा, घृतकुमारी या एलोवेरा जिसका वानस्पतिक नाम एलोवेरा बारबन्डसिस हैं तथा लिलिऐसी परिवार का सदस्य है। इसका उत्पत्ति स्थान उत्तरी अफ्रीका माना जाता है। एलोवेरा को विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है, हिन्दी में ग्वारपाठा,घृतकुमारी, घीकुंवार, संस्कृत में कुमारी, अंग्रेजी में एलोय कहा जाता है। औषधीय गुण एलोवेरा में कई औषधीय गुण पाये जाते हैं, जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों के उपचार में आयुर्वेदिक एंव युनानी पद्धति में प्रयोग किया जाता है जैसे पेट के कीड़ों, पेट दर्द, वात विकार, चर्म रोग, जलने पर, नेत्र रोग, चेहरे की चमक बढ़ाने वाली त्वचा क्रीम, शेम्पू एवं सौन्दर्य प्रसाधन तथा सामान्य शक्तिवर्धक टॉनिक के रूप में उपयोगी है। इसके औषधीय गुणों के कारण इसे बगीचों में तथा घर के आस पास लगाया जाता है। पहले इस पौधे का उत्पादन व्यावसायिक रूप से नहीं किया जाता था तथा यह खेतों की मेढ़ में नदी किनारे अपने आप ही उग जाता है। परन्तु अब इसकी बढ़ती मांग के कारण कृषक व्यावसायिक रूप से इसकी खेती को अपना रहे हैं, तथा समुचित लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

Desert Time

correspondent

Hemant Bhati

Hemant Bhati