एमजेएसए की बदौलत समृद्ध हुए खेत-खलिहान

— पाईप्स उगल रहे मुनाफे की धाराएँ
भीलवाड़ा । मरु प्रदेश को पानी की समस्या से मुक्ति दिलाकर विकास की धाराओं-उपधाराओं का प्रवाह तेज करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की पहल पर राजस्थान भर में चलाया जा रहा मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान (एमजेएसए) अब तक सम्पन्न हुए चरणों में आशातीत सफलता के साथ ऎतिहासिक उपलब्धियों भरा रहा है।
जल संकट से जूझने वाले इलाकों में अब पानी की कमी दूर हुई है और आम लोक जीवन में हरियाली का मंजर दिखने लगा है। प्रदेश भर की तरह भीलवाड़ा जिले मेंं भी मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान की गतिविधियों ने खासी उपलब्धियां दर्शायी हैं। इनसे आम लोगों के साथ ही खेती-बाड़ी करने वाले किसानों और पशुपालकों को लाभ मिला है और उनका जीवनस्तर सुधरने लगा है।
माण्डलगढ़ पंचायत समिति के अन्तर्गत ग्राम पंचायत रलायता के गांव हरिसिंहजी का खेड़ा गांव के रहने वाले कृषक जगन्नाथसिंह राजपूत के लिए मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान वरदान सिद्ध हुआ है। उनके खेत की भौगोलिक स्थिति असमान होने के कारण सही तरीके से सिंचाई नहीं हो पाती थी और इससे आशा के अनुरूप उपज भी नहीं मिल पाती थी। खेत के कूए में पानी कम होेने से आधा पानी तो खेत में बनाए हुए धोरों में रिस जाने की समस्या भी बरकरार थी। इस कारण से फसलों को पूरा पानी नहीं मिल पा रहा था।
फसलों में सिंचाई की समस्या को दूर करने के लिए श्री जगन्नाथसिंह राजपूत ने रलायता ग्राम पंचायत के कृषि पर्यवेक्षक से मुलाकात की। वहीं से उन्हें मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के अन्तर्गत खेती-बाड़ी के लिए पाईप लाईन अनुदान पर पाईप लाईन की उपलब्धता की जानकारी मिली। अपने खेत के लिए यह योजना उन्हें भा गई और एचडीपीई पाईप ले लिए।
आसान हुई खेती-बाड़ी के लिए सिंचाई
जगन्नाथसिंह बताते हैं कि पाईप लाईन लगाने के बाद अब ऊबड़-खाबड़ जगह पर भी आसानी से पानी पहुँच जाता है और पूरे खेत में सिंचाई करना आसान हो गया है। इससे पानी का सदुपयोग भी होने लगा है और खेत की उपयोगिता एवं उत्पादन क्षमता भी बढ़ी है।
इधर पानी बचा, उधर उपज बढ़ी
एमजेएसए में उपलब्ध पाईप लाईन से आए सकारात्मक और लाभकारी बदलाव से खुश किसान जगन्नाथसिंह कहते हैं कि अब पाईप से सिंचाई सुविधा के कारण खेत में 10 बीघा की बजाय 15 बीघा भूमि में खेती होने लगी है। पाईप्स को आसानी से इधर-उधर ले जाना आसान हो गया है वहीं श्रम, समय और धन की भी बचत हुई है। फसल की उपज में बढ़ोतरी के साथ ही पानी की बचत भी हुई है। इससे जल के मितव्ययी सदुपयोग की भावनाएं साकार हुई हैं तथा जल संरक्षण का संदेश भी पसरा है।

correspondent

DesertTimes.in

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