‘अयोध्या’ का प्रसाद ‘दुर्गगाथा

— दुर्ग गाथा के साथ वीर दुर्गादास फिर मारवाड़ की धरा पर
जोधपुर। हाल ही में पाठकों के सामने लेखक अयोध्या प्रसाद गौड़ की नई रचना दुर्गगाथा के रूप में प्रकट हुई । दुर्गादास के चरित्र को ध्यान में रख लेखक अयोध्या प्रसाद गौड़ ने तय परिभाषा वाले नाटक की श्रेणी से बाहर निकल लाइट एंड साउंड शो को ध्यान में रख कर दुर्ग गाथा की रचना की है। लेखक की बदौलत गाथा के साथ मारवाड़ की धरा पर फिर प्रकट हुए हैं वीर दुर्गादास । पाठक ‘अयोध्या’ के प्रसाद ‘दुर्गगाथा’ का रसास्वाद कर रहे हैं ।
मारवाड़ को बचाने दुर्गादास का पूरा जीवन दांव पर
वीर दुर्गादास को कौन नहीं जानता। ऐसा देशभक्त जिसने मुगल साम्राज्य से मारवाड़ को बचाए रखने के लिए अपना पूरा जीवन दांव पर लगा दिया। और जब मारवाड़ और इसके महाराजा सुरक्षित हो गए तो उन्हें यहां से निष्कासित कर दिया गया। सदियों पश्चात अब वहीं दुर्गादास एक बार फिर मारवाड़ की धरा पर प्रकट हुआ है दुर्ग गाथा के रूप में।
शो के माध्यम से साक्षात वीर दुर्गादास का दर्शन
इस शो के माध्यम से एक बार फिर लोगों को वीर दुर्गादास को साक्षात देखने का अवसर मिल रहा है। यही कारण है इस शो को देखने इन दिनों भारी भीड़ उमड़ रही है। वीर दुर्गादास के चरित्र ने हमेशा लोगों को आकर्षित किया, लेकिन यह पहला अवसर है जब उन्हें दुर्ग गाथा के माध्यम से दुर्गादास को साक्षात देखने का अवसर मिल रहा है।

 

 

 


correspondent

Gulam Mohammad

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