बही साहित्य सरिता, हुआ सम्मान

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— 14 वें अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन के समापन अवसर पर संगोष्ठी में उभर कर आए विचार
— राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष इंदुशेखर तत्पुरूष ने कहा, धर्म और राष्ट्रीयता की भारतीय अवधारणा विश्व हित में
उदयपुर । एक अक्टूबर को जयपुर से प्रारंभ हुए 14 अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का समापन बुधवार को राजस्थान हिंदी साहित्य अकादमी के एकात्मक सभागार में समारोह पूर्वक हुआ। सृजनगाथा डॉट कॉम की ओर से आयोजित इस सम्मेलन के समापन अवसर पर “धर्म और राष्ट्रीयता -असली-नकली मायने“ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई तथा वार्षिक अलंकरण समारोह में देश-विदेश से आए साहित्यकारों को विभिन्न साहित्यिक विधाओं में अवधान के लिए सम्मानित किया गया।
भारतीय परंपरा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की पोशाक
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष इंदुशेखर तत्पुरुष ने विषय पर विचार रखते हुए कहा कि भारतीय परंपरा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की पोशाक रही है। यही विश्व के हित में भी है। धर्म एवं राष्ट्रीयता की परिकल्पना ना वैश्विक विचार की विरोधी है और ना ही किसी अन्य सम्प्रदाय के विरोध में।
धर्म एवं राष्ट्रीयता के मायने संकीर्ण
संगोष्ठी में साहित्यकार मंगला रानी एवं सुजाता चौधरी ने मुख्य आलेख पढ़ते हुए कहा कि आज के समय में धर्म एवं राष्ट्रीयता के मायने संकीर्ण हो चले हैं इस से मानवता पर खतरा मंडराने लगा है। हमें संकीर्णता से ऊपर उठकर मानव कल्याण को सर्वोपरि रखना होगा। साहित्यकार एवं सम्मेलन की राज्य संयोजक किरण बाला जीनगर ने कहा कि पुरातन भारतीय संस्कृति में हमें इसका हल मिलता है जहां समूचे विश्व को परिवार मानने तथा मानव मात्र के कल्याण की परिकल्पना की गई है।
इनके विचार
इलाहाबाद से आए वरिष्ठ आलोचक व कवि शिव प्रकाश मिश्र ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए अपने विचार रखे। विशिष्ट अतिथि जयपुर से आए देश के प्रख्यात कवि सवाई सिंह शेखावत सहित नामचीन गजलकार मंसूर उस्मानी, अजय पांडे, मनोहर श्रीमाली तथा स्वामी शिव ज्योतिष आनंद ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया।
साहित्यकारों का सम्मान
सृजनगाथा डॉट कॉम की ओर से इस अवसर पर वार्षिक अलंकार प्रदान किए गए। लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड श्रीप्रकाश मिश्रा, गिरिजा शंकर पांडे स्मृति सम्मान डॉ मंसूर उस्मानी को प्रदान किया गया। विभिन्न विधाओं में साहित्यिक योगदान देने वाले सोलह प्रख्यात साहित्यकारों को प्रतीक चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, सम्मान राशि एवं कृति भेंट कर सम्मानित किया गया।
अगले वर्ष रूस में होगा सम्मेलन
सम्मेलन के आयोजक वरिष्ठ साहित्यकार जयप्रकाश मानस ने बताया कि प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन एक वर्ष देश में एवं अगले वर्ष विदेश में आयोजित किया जाता है। 14वां सम्मेलन इस बार राजस्थान में आयोजित हुआ। 15वां सम्मेलन अगले वर्ष रूस के मास्को में आयोजित किया जाएगा

correspondent

anand m vasu

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