डेजर्ट में ‘आई’ प्रोब्लम

— पश्चिमी राजस्थान में हर साल एक लाख नेत्र रोगी आ रहे सामने — रेतीली भूमि, असंतुलित खान-पान और आंखों के प्रति लापरवाही की वजह से बढ़ रहे मामले, कंप्यूटर क्रांति के बाद स्थिति और बिगड़ी जोधपुर । मरूस्थल में आंखों की समस्याएं चिंता का​ विषय बन रहा है। एक शोध के अनुसार डेजर्ट में 'आई' प्रोब्लेम बढ़ रही है । इस शोध के अनुसार पश्चिमी राजस्थान में नेत्र रोगी बढ़ रहे हैं। हर साल करीब एक लाख रोगी सामने आ रहे हैं। दिल्ली के एक एनजीओ की सचिव शीतल उपनयना ने पिछले पांच साल में डेजर्ट में शोध किया। ‘ए स्टडी फार आई प्राब्लम इन डेजर्ट’ नाम के शोध-पत्र में उन्होंने बताया कि पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में प्रदूषित पानी, रेतीली भूमि, साल भर चलने वाली हवा, असंतुलित खान-पान और कंप्यूटर क्रांति के चलते नेत्र रोगी बढ़ रहे हैं। पश्चिमी राजस्थान में बढ़े आंखों के रोगी पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, फलौदी, ओसियां, बिलाड़ा, भोपालगढ़ और पोकरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में आंखों के रोगी बढ़े हैं। साल में औसत एक लाख नेत्र रोगी हर साल सामने आ रहे हैं। डा. राजीव देसाई के अनुसार मारवाड़ के लोग आंखों के प्रति लापरवाही बरत रहे हैं। दैनिक दिनचर्या ऐसी है कि आंखों के प्रति लोग सजग नहीं हैं। रही सही कसर कंप्यूटर के बढ़ते प्रभाव ने पूरी कर दी। मोबाइल का अधिकाधिक उपयोग करने से भी आंखों पर असर पड़ने लगा है। क्या कहता है शीतल उपनयना का शोध शोध के मुताबिक पश्चिमी राजस्थान में हर तीसरे दिन निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर आयोजित हो रहे हैं। इनमें औसत 150 मरीज जांच करवा रहे हैं। साल में करीब 60 हजार नेत्र रोगी सामने आ रहे हैं। निजी व सरकारी अस्पताल और अन्य क्लीनिक में करीब 40 हजार रोगी जांच करवाते हैं। इस तरह साल में करीब एक लाख रोगी आंखों की जांच करवा रहे हैं। इनमें दस प्रतिशत लोगों में मोतियाबिंद पाया गया है। आंखों के रोग का कारण यहां का पानी प्रदूषित होने से भी नेत्र रोगी बढ़ रहे हैं। साथ ही असंतुलित खान-पान और आंखों के प्रति लापरवाही भी इन रोगों की वजह है। यहां साल भर तेज हवा चलती है और रेत उड़ती है, इस वजह से भी रोगी बढ़ रहे हैं। साथ ही कंप्यूटर व मोबाइल क्रांति भी नेत्र रोगियों के बढ़ने का बड़ा कारण है। वासन व एएसजी अस्पताल ने बनाया मुकाम नेत्र रोगियों के लिए वासन आई केयर और एएसजी अस्पताल ने नया मुकाम बनाया है। यहां प्रदेश के कई हिस्सों से नेत्र रोगी जांच करवाने आते हैं। साथ ही आपरेशन और विभिन्न प्रकार के उपचार की दिशा में इन दोनों अस्पताल की विशेष पहचान है। एक अनुमान के अनुसार नेत्र रोगियों में से 55 प्रतिशत मरीज निशुल्क चिकित्सा शिविरों में अपनी आंखों की जांच व आपरेशन करवाते हैं। दृष्टि है तो सृष्टि है जीवन में अगर दृष्टि निकल जाए तो सारे सुख फीके पड़ जाते हैं। दृष्टि सही होगी तभी सृष्टि सुखद होगी। इसलिए लोगों को अपनी आंखों के प्रति सजगता बरतनी होगी।

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DesertTimes.in

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