तुलसी : पतिव्रता और देवी, इसलिये रात में नहीं छूते

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— शास्त्रों में तुलसी के पत्तों को शाम के बाद तोड़ना वर्जित
जैसलमेर । शास्त्रों में तुलसी के पत्तों को शाम के बाद तोड़ना वर्जित माना गया है। यदि बहुत ही जरूरी हो तो रात में प्रार्थना करने के बाद सिर्फ औषधि के रूप में ही पत्तों को तोड़ा जा सकता है। सामान्यत: तुलसी के पत्ते शाम के बाद नहीं तोड़े जाते। इसके अलावा कुछ ऐसे दिन भी तय हैं जिनमें तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते। ये दिन रविवार, मंगलवार, गुरुवार हैं।
कारण
इसके पीछे कारण है कि तुलसी पतिव्रता हैं। तुलसी के पत्ते की खासियत यह है कि यह औषधीय रूप से सर्वश्रेष्ठ है। चराचर का विष नष्ट करने की क्षमता तुलसी में पाई जाती है। इसके प्रति सनातन धर्म में सदा ही पूज्य भाव रहा है। सबसे बड़ी बात यह कि यह भगवान के मस्तक पर विराजमान होती है।
महत्ता
तुलसी की महत्ता कितनी है यह इस बात से भी पता चलता है कि रूक्मणि को यह घमंड था कि भगवान कृष्ण उन्हें बहुत मानते हैं। नारद ने घमंड तोड़ने के लिए तुलादान कराया। तराजू पर रुकमणि के बैठने और बड़ी मात्रा में आभूषण लादने के बाद भी कृष्ण का पलड़ा भारी था। तब जैसे ही तुलसी रखी गई तो रूक्मणि का पलडा भारी हो गया।
दरअसल कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन तुलसी से विष्णु का विवाह होता है। रात में तुलसी को इसलिए नहीं छूते क्योंकि वे पतिव्रता हैं और देवी हैं।

correspondent

anand m vasu

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