100 साल बाद जानलेवा हो जाएगी दुनिया

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जोधपुर। ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते इंसान का भविष्य पर सवाल खड़े होते जा रहे हैं। दुनिया की तीन-चौथाई आबादी को भयानक लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ सकता है।  1980 से लेकर अब तक दुनिया के 1,900 अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में लोग लोग गर्मी और उमस के कारण मारे गए हैं।

2100 तक घातक हो जाएगी हो लू

2003 में पैरिस में करीब 4,900 लोग गर्मी और उमस के कारण मारे गए। 2010 में मॉस्को के अंदर 10,800 लोगों की गर्मी के कारण मौत हुई। शोधकर्ताओं के मुताबिक, साल 2000 में दुनियाभर में बड़ी तादाद में लोग 20 दिन या इससे भी ज्यादा समय तक गर्मी के कारण बेहद जानलेवा स्थिति के शिकार हुए। सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात तो यह है कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को घटाने की हरसंभव कोशिश करने पर भी दुनिया की 47 फीसदी से ज्यादा आबादी 2100 तक घातक व जानलेवा लू का शिकार हो जाएगी।

correspondent

Akhil Vyas

Akhil Vyas

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