जेकेके में हुआ ‘वेटिंग फॉर गोडॉट‘ का मंचन

जयपुर। जवाहर कला केंद्र के रंगायन सभागार में आज शाम सैमुअल बेकेट के हास्यनाटक ‘वेटिंग फॉर गोडॉट‘ का मंचन किया गया। संकेत जैन द्वारा डिजाइंड और डायरेक्टेड यह नाटक बीसवीं सदी के मध्य यूरोप में मनुष्य की स्थिति एवं दुर्दशा पर आधारित है। नाटक में दो पात्र – व्लादिमीर और एस्ट्रागन होते हैं जो ‘गोडॉट‘ नाम के किसी व्यक्ति के आगमन के लिए अंतहीन और व्यर्थ इंतजार कर रहे होते हैं। व्लादिमीर इस नाटक की ‘आत्मा‘ है तो एस्ट्रागन इसका ‘शरीर‘। व्लादिमीर और एस्ट्रागन को चिंता है कि क्या कोई ‘गोडॉट‘ है? वह कैसा दिखता है? वह कैसा व्यवहार करता है? क्या आखिर में वह आ जाएगा? वह उसके लिए क्या करेगा? क्या उन्हें उससे कोई उम्मीद रखनी चाहिए? वे इनमें से किसी भी प्रष्न का जवाब नहीं जानते हैं, इसलिए वे अधरझूल में हैं। व्लादिमीर और एस्ट्रागन के अतिरिक्त नाटक में पोजो (मालिक) और लकी (गुलाम) के अतिरिक्त एक अन्य पात्र भी था, जो संदेष वाहक की तरह कार्य करता है। लेकिन नाटक का मुख्य पात्र ‘गोडॉट‘ मंच पर नहीं आता। यह नाटक पात्रों के बारे में है, ना कि इस बारे में कि पात्रों को क्या होता है। इस नाटक में ऐसे मनुष्य का चित्रण किया गया है जिसके पास ना तो किसी भी प्रष्न का जवाब है ना ही किसी प्रकार की अनिश्चितताएं।
नाटक के निदेशक, संकेत जैन का कहना है कि, ‘‘मैंने इस नाटक का चुनाव इसलिये किया क्योंकि इसका कन्टेंट वर्तमान में भी प्रासंगिक है। इस नाटक के पात्रों में मनुष्य के जीवन के अकेलेपन और उद्देष्यहीनता का वर्णन किया गया है। यह नाटक में समाज में विभिन्न वर्गों के उत्पीड़न पर भी प्रकाश डालता है। इस प्रकार से हम हमारे जीवन में कुछ अच्छा और सकारात्मक होने की अथवा ‘गोडाॅट‘ के आने की प्रतीक्षा करते हैं। नाटक में अभिनय करने वाले कलाकारों में महमूद अली (एस्ट्रागन), व्लादिमीर (उमेष वर्मा), योगेन्द्र सिंह (पोजो), रोहन (लकी) और सव्ये साची (संदेष वाहक) शामिल थे। ‘वेटिंग फाॅर गोडॉट‘ बेकेट के स्वयं के मूल फ्रेंच संस्करण ‘एन अटेंडेंट गोडॉट‘ का अनुवाद है, जिसे ‘ए ट्रेजीकाॅमेडी इन टू एक्ट्स‘ में सबटाइटल (अंग्रेजी भाषा में) किया गया है। उनकी मूल फ्रेंच रचना 9 अक्टूबर 1948 से 29 जनवरी 1949 के मध्य तैयार की गई थी।


Desert Time

correspondent

Hemant Bhati

Hemant Bhati

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