समझौता वार्ता विफल, हैड पर धरना जारी

 नोरंगदेसर-रावतसर वितरिकाओं को पूरा चलाने की मांग श्रीगंगानगर। इन्दिरा गांधी नहर परियोजना में पंजाब से अतिरिक्त मिल रहे लगभग 2200 क्यूसेक पानी के मद्देनजर मसीतांवाली हैड से निकलने वाली रावतसर एवं नोरंगदेसर वितरिकाओं को उनकी पूरी क्षमता के अनुसार चलाये जाने की मांग को लेकर किसान प्रतिनिधियों-सरकारी अधिकारियों में आज देर शाम वार्ता विफल हो गई। बड़ी संख्या में किसान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने आज दूसरी रात भी मसीतांवाली हैड पर धरना जारी रखने का फैसला किया है। हनुमानगढ़ जिले में तलवाड़ा थाना क्षेत्र में मसीतांवाली हैड पर आज पूरे दिन सैकड़ों की तादाद में किसान डटे रहे। इनकी अगुवाई कर रहे किसान नेता प्रो. ओम जांगू तथा माकपा नेता बलवान पूनिया व अन्य किसान प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचे जल संसाधन विभाग के दो कनिष्ठ अभियंताओं, एसडीएम व डीएसपी आदि अधिकारियों के साथ कईं दौर की वार्ता की। देर शाम को एक बार फिर वार्ता हुई, लेकिन यह विफल हो गई। प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधियों की फोन पर जल संसाधन विभाग के उच्चाधिकारियों से बात करवाई। जानकारी के मुताबिक जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने सोमवार से पहले इन दोनों नहरों मेें और पानी छोडऩे से साफ इंकार कर दिया। जानकारी के अनुसार मसीतांवाली हैड से निकलने वाली इनमें से एक नहर साढ़े 600 क्यूसेक और दूसरी नहर करीब 550 क्यूसेक क्षमता की है। पिछले कुछ दिनों से इन नहरों में 350 व 200 क्यूसेक पानी चलाया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि पानी कम मिलने से फसलें प्रभावित हो रही हैं। दोनों नहरों की टेल के किसानों तक पानी पहुंच ही नहीं रहा। बता दें कि इस बरसाती मौसम में पानी की प्रचूर मात्रा को देखते हुए इन्दिरा गांधी नहर में करीब एक सप्ताह से दो हजार-बाइस सौ क्यूसेक पानी ज्यादा छोड़ा जा रहा है। यह अतिरिक्त पानी प्रथम चरण क्षेत्र की बजाय द्वितीय चरण क्षेत्र की नहरों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रथम चरण के किसानों का कहना है कि विभाग में स्पष्ट प्रावधान है कि अतिरिक्त पानी पहल के आधार पर प्रथम चरण क्षेत्र की नहरों को दिया जायेगा। इस प्रावधान का उल्लंघन कर पानी को द्वितीय चरण में ले जाया जा रहा है। नोरंगदेसर व रावतसर वितरिकाओं में उनकी पूरी क्षमता के अनुसार पानी देने की मांग को लेकर शुक्रवार को किसानों ने मसीतांवाली हैड पर धरना लगा दिया था। यह धरना रात को भी जारी रहा। आज दिन में कईं बार वार्ता हुई, लेकिन सिरे नहीं चढ़ी। जल संसाधन अधिकारियों का कहना है कि रेगुलेशन के मुताबिक इन दोनों नहरों में परसों सोमवार को पूरी क्षमता का पानी छोडऩा तय है। इससे पहले किसी भी सूरत में इन नहरों को और पानी नहीं दिया जा सकता। द्वितीय चरण में कुछ नहरें ऐसी हैं, कि अगर उन्हें पानी नहीं दिया गया, तो उनको 28 दिन बाद पानी मिलेगा।

correspondent

Sanjay Sethi

Sanjay Sethi