हमारा पर्यावरण : पर्यावरण ‘परि’ और ‘आवरण’ से मिलकर बना है

अवधेश कुमार 'अवध' प्रधान संपादक - साहित्य धरोहर संपादकीय विशेष हमको समुचित जीवन जीना है तो अपने पर्यावरण के बारे में जानकारी होनी चाहिये । पर्यावरण को जाने बिना हम दिशाहीन हैं। लेकिन आज के समय में हम सब मिलकर पर्यावरण को बहुत बर्बाद कर रहे हैं। आइये चर्चा करें कि आखिर पर्यावरण किसको कहते हैं । इसको हम इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं- ‘हमारे आस - पास रहने वाली सभी चीज़ें जिससे हम घिरे हैं, हमारे पर्यावरण का हिस्सा हैं’। पर्यावरण 'परि' और 'आवरण' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ आदमी और जीवधारी के चारों की चीजों को कहते हैं। पर्यावरण को अंग्रेजी में environment कहते हैं। हमारा पर्यावरण इस दुनिया में जीवन का अस्तित्व बनाये रखता है। बिना समुचित व संतुलित पर्यावरण के हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते । पृथ्वी एक ऐसी जगह है पूरे ब्रह्मांड की जहाँ पर जीवन जीना सम्भव है। पृथ्वी पर जीवन को जीना इसलिए सम्भव है क्योंकि पृथ्वी का पर्यावरण हमारे जीवन के जीने योग्य है। अगर हमारा पर्यावरण हमारे अनुसार नहीं होता तो कभी भी पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती थी। पर्यावरण में कीड़े - मकोड़े से लेकर पेड़ - पौधे सभी आते हैं। पर्यावरण को मुख्यत: दो भागों में बाँटा जा सकता है- प्राकृतिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण। मानव निर्मित पर्यावरण से हमारे प्राकृतिक पर्यावरण पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। आज के समय में हम लोग पर्यावरण के नियम से बहुत छेड़छाड़ कर रहे हैं जिसके कारण पर्यावरण का संतुलन बहुत ही तेजी से बिगड़ रहा है। अगर ये छेड़छाड़ ऐसे ही चलता रहा तो इससे पर्यावरण पर एक बहुत बड़ा संकट आ जायेगा। पर्यावरण में बहुत से ऐसी समस्याएँ हैं जिनके कारण हमारे जीवन पर संकट है। आज के समय में हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम अपने पर्यावरण के प्रति कितने जागरूक हैं ! पर्यावरण को जीने लायक बनाने के लिये हमको वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण एवं मृदा प्रदूषण पर पूरा नियंत्रण करना होगा। प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए हमको अपने पर्यावरण का संतुलन बनाये रखना होगा। आज पर्यावरण पूरी दुनिया में एक बहुत बड़ा मुददा बन गया है। इसको लेकर जागरूक होने की और भी अधिक आवश्यकता है। पर्यावरण को सबसे ज्यादा खतरा शहरों से है। बड़े - बड़े शहरों में बड़े - बड़े कारखाने हमारे पूरे पर्यावरण को बहुत प्रभावित करते हैं। शहरों के मुकाबले गावों में पर्यावरण को उतना ज्यादा प्रदूषित नहीं करते हैं। आज हम सब को पर्यावरण संरक्षण के बारे में बहुत गंभीर होकर सोचना होगा। लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना पड़ेगा। पर्यावरण का सीधा सम्बन्ध प्रकृति से है। हमको अपने प्रकृति को ठीक करने के लिए पर्यावरण संरक्षण करना होगा। एक बढ़िया पर्यावरण का निर्माण करने के लिए ये जरुरी है कि हम सब मिलकर पर्यावरण संरक्षण करें। पर्यावरण संरक्षण करने के लिए हमको इसके बारे में अपनी आने वाली पीढ़ी को बताना होगा। जब हमारी आने वाली पीढ़ी को इसके बारे में पता चलेगा तभी वह पर्यावरण संरक्षण कर पायेगी। शिक्षा के माध्यम से हम सभी को पर्यावरण का ज्ञान लोगों को देना होगा। अगर हम आज की बात करें तो कह सकते हैं कि जिस तरह से आज दुनिया में नई - नई चीजों की खोज हो रही है उसके साथ ही हम लोग रोज अपने पर्यावरण को बहुत ही तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। पर्यावरण का हमारे तकनीक और विज्ञान से बहुत गहरा रिश्ता है। इसलिए ये जरुरी है कि हम शिक्षा के माध्यम से पर्यावरण की उपयोगिता को लोगों को बतायें और पर्यावरण को बढ़िया बनाने में अपना पूरा योगदान दें। पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पूरी दुनिया में हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। भारत सरकार ने पर्यावरण क़ानून भी बनाया है जिसके द्वारा हम पर्यावरण की सुरक्षा करते हैं। सिर्फ इतना ही काफी नहीं है अपितु हम सबको पर्यावरण सुरक्षा के लिये नैतिक जिम्मेवारी लेनी होगी ।

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