माता पिता के चरणों में सुख, सम्पति व समृद्धि-जैनाचार्य

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मणि प्रभ सागर सूरिश्वरजी माता पिता के चरणों में सुख, सम्पति व समृद्धि-जैनाचार्य मणि प्रभ सागर सूरिश्वरजी 

बीकानेर। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्य जिन मणिप्रभ सागर सूरिश्वरजी ने रविवार को बागड़ी मोहल्ला की ढढ्ढा कोटड़ी में विशेष प्रवचन में कहा कि मां जितना वात्सल्य, प्रेम, स्नेह व आत्मीयता कोई नहीं रख सकता। माता-पिता को पूर्ण सम्मान से सुख, सम्पति व समृद्धि तथा वैभव की प्राप्ति होती है।  उन्होंने कहा कि जीव से लेकर तीर्थंकर व देवों तक को मां प्रिय व सम्मानीय रही है। मां के ममत्व, खुद का विस्मरण कर बच्चों की पीड़ा, दर्द को दूर करने के लिए पूर्ण समर्पण भाव को शब्दों में बांधा नहीं जा सकता। आचार्यश्री ने कहा कि बच्चों के लिए मां से सुन्दर कोई व्यक्ति नहीं हो सकता। व्यक्ति चाहे कितना ही बड़ा हो जाए, पद, वैभव व ताकत प्राप्त करलें, लेकिन मां के वात्सल्य व स्नेह रूप् मं वह बालक ही रहता है। घर में माता पिता के रहते उनसे आशीर्वाद नहीं लेने वाले व उनको सम्मान नहीं देने वाले दुर्भाग्यशाली व अभागे होते है। मां के सामने बोलना, उनका अपमान करना, उनको पीड़ा व बैचनी, दुःख व तकलीफ देना मां के गला दबाने से भी घटिया काम है। भले ही वे बाहर कुछ भी प्राप्त कर ले, लेकिन मानसिक शांति नहीं प्राप्त कर सकते ।  आचार्यश्री ने कहा कि वे पुत्र सौभाग्यशाली है जिनको माता पिता का साथ व आशीर्वाद मिलता है। उन्होंने  भगवानश्रीराम, भगवान महावीर, कृष्ण व श्रवण कुमार का स्मरण करते हुए कहा कि माता पिता को सम्मान देने वाले जग में सम्मान प्राप्त करते है वहीं अपमान व तिरस्कार करने वाले हमेशा अपमानित व तिरस्कृत होते है। जैनाचार्य ने कहा कि अहिंसा परमोधर्म का सिद्धान्त मानने वाले तथा पानी छानकर पीने वाले जैन धर्म में कन्या भ्रूण हत्या घोर पाप है। वर्तमान में छाया सभी को चाहिए लेकिन पेड़ लगाना कोई नहीं चाहता, पानी चाहिए लेकिन उसको बचाना नहीं चाहता, लोगों को बहुएं चाहिए लेकिन बेटियों को बचाना नहीं चाहता। यह वैचारिक दुर्दशा है। वंश चलाने के नाम पर कन्या क की भू्रण हत्या करना अनर्थ  कार्य है। वंश महत्वपूर्ण नहीं जीवन महत्वपूर्ण है। कन्याएं माता पिता की सेवा मन से करती है। जैन समाज में घटती कन्याओं की संख्या चिंताजनक है। जैन समाज के अनुयायी कन्या भू्रण हत्या नहीं करें तथा जैन व अजैन समाज में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए जागृति लाएं। तपस्या की अनुमोदना- जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ में पुत्र के साथ दीक्षा लेने वाली साध्वीश्री प्रिय मुद्रांजनाश्रीजी के 14 दिन की व श्राविका मनीषा कोचर की 9 दिन की तपस्या की अनुमोदना आचार्यश्री के सान्निध्य में चतुर्विद संघ ने की। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की ओर से तपस्वी मनीषा कोचर व बाहर से आए श्रावक श्राविकाओं का अभिनंदन किया गया। सामूहिक स्नात्र पूजा- जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के आचार्य, साध्वीश्री प्रिय श्रद्धांजनाश्री के नेतृत्व में रविवार को नाहटा मोहल्ले के प्राचीन आदिनाथ भगवान मंदिर में सामूहिक स्नात्र पूजा का आयोजन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं शामिल हुई। शिविर- आचार्यश्री के सान्निध्य में महावीर भवन, ढढढा कोटड़ी व सुगनजी महाराज के उपासरे में बालक-बालिकाओं तथा श्रावक-श्राविकाओं का विशेष शिविर रविवार को धर्म, आध्यात्म आदि का विशेष शिविर आयोजित किया गया।

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