आईसीयू में नवजात की मौत पर बवाल

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedin

 देखभाल के लिए नर्सिंग स्टाफ ने वसूले रुपये,  चिकित्सा अधिकारी सहित कइयों पर केस दर्ज
हनुमानगढ़ । हनुमानगढ़ जिले के रावतसर कस्बे के सरकारी अस्पताल में एक नवजात बच्चे की आईसीयू वार्ड में समुचित देखभाल न होने के कारण मौत हो जाने का मामला सामने आया है। इसे लेकर मृतक नवजात बच्चे के परिवार वालों ने काफी हंगामा मचाया, जिस पर पुलिस ने चिकित्सा अधिकारी और नर्सिंग स्टाफ के तीन कर्मचारियों पर इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। इस बच्चे को आईसीयू में भर्ती करने के बाद अस्पताल के स्टाफ ने देखा ही नहीं कि वार्ड में ऑक्सीजन की सुविधा है या नहीं? लाइट चले जाने पर जरनेटर तक नहीं चलाया गया, जिससे इस बच्चे की दो-तीन घंटे बाद ही मौत हो गई। पुलिस ने मृतक बच्चे के शव का तीन डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया है। साथ ही इस मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार चक 21-22 डीडब्ल्यूडी निवासी पीरदान मेघवाल द्वारा दी गई रिपोर्ट पर यह मामला दर्ज किया गया है। पुलिस को पीरदान ने बताया है कि उसकी बहन सुमन (पत्नी राकेश) को 13 जुलाई की दोपहर को प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। सुमन ने कल गुरुवार को स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। इसके कुछ देर बाद नर्स प्रीतम कौर ने बच्ची के वीसीजी का इंजेक्शन लगाया। बच्ची की तबीयत कुछ देर बाद बिगडऩे लगी। नर्सिंग स्टाफ ने बच्ची को आईसीयू वार्ड में ले जाकर भर्ती कर दिया। पीरदान का आरोप है कि आईसीयू वार्ड में बच्ची की देखभाल करने की ऐवज में प्रीतम कौर के अलावा दो और नर्सांे सुमन एवं सावित्री ने पांच-पांच सौ रुपये की मांग की, लेकिन इनको दो-दो सौ रुपये दे दिये। पीरदान के मुताबिक कल शाम को लाइट चले जाने के बाद किसी ने भी जाकर जनरेटर नहीं चलाया। जरनेटर के पास कोई कर्मचारी नहीं था। इस कारण आईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित हो गई। ऑक्सीजन न मिलने से बच्ची की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार बच्ची की मौत हो जाने का पता चलने पर उसके परिवार वालों में रोष फैल गया। उन्होंने अस्पताल मेें इस अव्यवस्था के लिए चिकित्सा अधिकारी डॉ. गौरीशंकर को भी जिम्मेवार ठहराया है। आज सुबह पीरदान द्वारा दी गई रिपोर्ट पर इन सबके विरुद्ध धारा 304 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने तीन डॉक्टरों नरेन्द्र शेखावत, भीम गोयल और प्रहलाद पर आधारित बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत के कारण का पता चल पायेगा। इस बीच ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. गौरीशंकर की अगुवाई में यह चिकित्साकर्मी डीएसपी जयसिंह दइया से मिले। उनसे इस मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की। साथ ही ऐतराज किया कि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जाना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने भी एक फैसले में स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकारी कर्मचारियों पर प्रशासन की मंजूरी के बिना एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। इस मामले को लेकर चिकित्साकर्मियों ने प्रेस वार्ता भी की। प्रेस वार्ता मेें उन्होंने इस सारे मामले को गलत बताया। उल्टा आरोप लगाया कि बच्ची के परिवार वालों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।

correspondent

Sanjay Sethi

Sanjay Sethi

Facebook Auto Publish Powered By : XYZScripts.com