प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना डॉ. शशि संखला ने दी प्रस्तुति

जेकेके में आज प्रदर्षित किए गए कथक नृत्य के विभिन्न रूप

जयपुर। जवाहर कला केंद्र (जेकेके) में आज जयपुर घराने की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित कथक नृत्यांगना डॉ. शशि शंखला द्वारा निर्देषित व इनकी परिकल्पना कथक नृत्य प्रस्तुति- ‘समष्टि‘ प्रस्तुत की गई। भगवान f’ko, उनकी पत्नी देवी पार्वती एवं पुत्र भगवान गणपति की स्तुति ‘रंगीलो शंभु‘ के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। यह रचना राजस्थानी भाषा में प्रस्तुत की गई, जिसके जरिए नृत्य के देवता भगवान षिव के विभिन्न गुणों को दर्षाया गया। इसके बाद पारम्परिक बंदिष प्रस्तुत की गई। नृत्य के सभी आवष्यक तत्वों- शरीर के मूवमेंट्स, घुमावों व लयबद्ध कदमतालों के जरिए कथक के मूल पहलुओं को बखूबी प्रदर्षित किया गया। ’राग कलावती’ पर ‘तराना‘ की प्रस्तुति भी दी गई। राजस्थान के विष्व प्रसिद्ध पारंपरिक त्यौहार- ‘गणगौर‘ पर आधारित एक खूबसूरत रचना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। दर्षकों को तीज व गणगौर के अवसर पर गाए जाने वाले लोकप्रिय राजस्थानी लोक गीतों के साथ पारम्परिक जयपुर घराना के कथक का बेहतरीन मिश्रण भी देखने को मिला। राजस्थान के समृद्ध लोक संगीत के प्रामाणिक स्वाद को प्रदर्षित करने के लिए गणगौर के विभिन्न गीतों को एक प्रस्तुति में पिरोया गया। संगीतकारों की इस टीम में 13 नर्तकों द्वारा कथक नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस टीम में गायन व हारमोनियम पर रमेष मेवाल, सितार पर हरिहर शरण, तबला पर मुजफ्फर रहमान, पर्कषन पर परमेष्वर, ढोलक पर बाबू खान, सारंगी पर अमीरुद्दीन खान एवं पखावज पर करण पंवार ने साथ दिया।


Desert Time

correspondent

Hemant Bhati

Hemant Bhati

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