देश की पहली गायों के शव दाह मशीन झुंझुनू में लगेगी

फरीदाबाद में तैयार गैस आधारित शव दाह मशीन, झुंझुनूं की गोपाल गोशाला में देश की पहली शव दाह मशीन लगेगी, फरीदाबाद की कंपनी ने उठाया एेसी मशीन बनाने का बीड़ा. मनुष्य के शव दाह की ऐसी मशीनें बनाती है ये कंपनी
झुंझुनूं। अभी तक तो लकड़ी बचाने और अन्य कारण बताते हुए मनुष्य का अंतिम संस्कार बिजली या गैस आधारित शव दाह मशीन से करने की बातें सामने आती रही हैं। देश और प्रदेश में कई स्थानों पर मोक्ष धाम में ऐसी मशीनें लगाई जा चुकी हैं, लेकिन झुंझुनूं की सबसे मशहूर गोपाल गोशाला ने इससे एक कदम आगे बढ़ाते हुए गायों का भी विधिवत अंतिम संस्कार करने के लिए गैस से चलने वाली शव दाह मशीन बनवाने का फैसला किया है। फरीदाबाद की कंपनी जल्द ही यह मशीन झुंझुनूं लाकर गोशाला के सामने मोक्ष धाम के पास लगाएगी। इस मशीन में मात्र दो कामर्शियल गैस सिलेंडर की गैस से गाय की अंत्येष्टि हो जाएगी। इस मशीन पर करीब पंद्रह लाख रुपए खर्च होंगे। कोई चाहेगा तो मनुष्य का दाह भी इस मशीन में हो सकेगा। गोशाला प्रबंधन की सोच यह है कि भविष्य में यहां तैयार हो रहे गोबर से बनने वाली गैस से ही इस मशीन को चलाया जाएगा। इस तरह मां कही जाने वाली गौ के मरने के बाद उसके शरीर की दुर्दशा न हो पाए।
इस तरह आया विचार
करीब बारह सौ गायों वाली गोपाल गोशाला के सचिव सुभाष चंद्र क्यामसरिया ने बताया कि एक राज्य में गायों की चमड़ी उतारने की घटना ने उन्हें व्यथित कर दिया। ऐसे में विचार आया कि हमारी गोशाला में भी आने वाली बीमार या रुग्ण गायों के मरने पर उनकी देह का निस्तारण मुश्किल भरा होता है। उन्हें दफनाने के लिए जमीन नहीं मिल पाती। फिर गाय को हम मां मानते हैं। उसकी देह की दुर्गति क्यों होनी चाहिए। इसलिए गोशाला प्रबंधन ने तय किया कि गाय का भी अंतिम संस्कार विधिवत रूप से किया जाए, लेकिन सामान्य तौर पर ऐसा करना बहुत महंगा और कष्टकारी होता है। इसलिए ऐसी मशीन बनवाने का विचार आया और अब तो जल्द ही ये मशीन लग जाएगी।
दो गैस सिलेंडर से काम चल जाएगा
क्यामसरिया ने बताया, इस मशीन में करीब तीस कामर्शियल गैस सिलंेडर जितनी गैस का स्टोरेज चैंबर बनाया जा रहा है। हालांकि एक गाय की अंत्येष्टि दो सिलेंडर की गैस से हो जाएगी। इस पर मात्र 2100 रुपए खर्च आएगा। प्राथमिकता तो हमारी गोशाला में मरने वाली गायों की अंत्येष्टि करने की रहेगी, लेकिन कोई अन्य आदमी अपने घर की गाय की मौत होने पर उसकी इस तरह अंत्येष्टि करवाना चाहेगा तो उसे इसकी इजाजत दी जाएगी।
पहली बार ही बनाई है ऐसी मशीन
फरीदाबाद की ओम सांई स्वरांत्रिका प्राइवेट लिमिटेड के प्रवक्ता ने बताया किया आम तौर पर उनकी कंपनी बिजली से चलने वाली मनुष्य के शव दाह की मशीन बनाते हैं, लेकिन गोपाल गोशाला की ओर से प्रस्ताव मिला तो हमने गाय के आकार को देखते हुए विशिष्ट प्रकार की गैस आधारित मशीन बनाने का फैसला किया। हमारी टीम ने यह मशीन लगभग तैयार कर ली है। इसे जल्द ही झुंझुनूं लाकर स्थापित किया जाएगा। गोशाला के कार्मिकों को इसके संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गोशाला में बनने वाले प्लांट की गैस का होगा उपयोग
क्यामसरिया ने बताया कि भविष्य में हम कामर्शियल गैस की बजाय हमारी गोशाला में बनाए जा रहे गोबर गैस प्लांट की गैस का उपयोग इस मशीन में करेंगे। इस तरह गाय के गोबर से बनने वाली गैस से ही गाय का अंतिम संस्कार हो सकेगा। अंत्येष्टि से निकलने वाली राख गोशाला के फार्म हाउस में खाद का काम करेगी। उनका कहना था कि बीमारी से, बूढ़ी होकर व हादसों में घायल यहां लाई जाने वाली गायों को मिला कर साल भर में करीब दो सौ गायों की मौत गोशाला में हो जाती है। यह मशीन लगने से काफी सहूलियत हो जाएगी। क्यामसरिया का कहना था कि गाय हमारी माता है, मरने के बाद उसके शरीर की दुर्दशा नहीं होनी चाहिए। यही सोचकर हमने यह फैसला किया है। अगस्त के आसपास ये मशीन लग जाएगी।


correspondent

Gulam Mohammad

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