बाड़मेर भाजपा : कहने वाले अपनी अपनी कह गए…

बाड़मेर।
बस, यूं ही आज विधानसभा में बाड़मेर के पूर्व व वर्तमान भाजपा नेताओं को देख बरबस ही कुछ बातें जहन में आ गई।
बात यूं शुरू हुई कि मैडम (सीएम) भाजपा के जिलाध्यक्ष संगठन को कमजोर करने में, गुटबाजी करने में और भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने में लगे है। ऐसे में हमारी कोई सुनता नहीं ऊपर से लंबे समय से हम भाजपा राज्य से वनवास पर है। दरअसल, भाजपा के इन वनवासियों को भाजपा के कदावर नेता देवीसिंह भाटी के रिश्तेदार और बाड़मेर के समाजसेवी तनसिंह चौहान सूबे की सीएम से मिलवाने जयपुर लाए थे। इनकी बात सूनने के बाद सीएम राजे पास बैठे प्रदेश अध्यक्ष परनामी के कानों में कुछ फंसफसाई। बस इतने में तो वनवासी खुश।
खुशी के कयास देखों
अपनी बात रखने के बाद विधानसभा से बाहर आए इन भाजपाई नेताओं से पूछा कि क्या हुआ अंदर। बोले हमें बड़ी फुर्सत से सूना। करीब सवा घंटे से भी ज्यादा का वक्त हमें सीएम ने दिया। हमने तमाम बाते उनके सामने रखी। उन्हें बताया कि कैसे हमें अलग किया गया, कैसे हमें वहां दरकिनार किया जाता है। फिर…क्या हुआ। बोले हमारी बात सुनने के बाद मैडम ने पास में बैठे प्रदेशाध्यक्ष परनामी के कान में कुछ बातें की, ये बात दीगर है कि हमें सुनाई नहीं दिया कि क्या बात हुई लेकिन आप देखना अभी आगामी 30 अप्रेल को जोधपुर में होने वाली बैठक में सकरात्मक निर्णय आएंगे। सकारात्मक का मतलब..वनवासी फिर राज्य में प्रवेश करेंगे। दीवाली आएगी। एक बार फिर पद पर सुशोभित किया जाएगा। वतर्मान में गड़बड़ी करने वालों की खैर नहीं..वगैरह..वगैरह।
मुझे अख़्तर नाज़मी का यह शेर याद आया-
कहने वाले अपनी अपनी कह गये,
मुझ से पूछो कुछ सुना है कुछ नहीं।।

पहले सामाजिक अब राजनीति का समझौता
लोकसभा चुनावों से आई दरार के बाद हाल ही में कुछ दिनों पहले क्षत्रिय युवक संघ के भगवानसिंह रोलसाहबसर और कुछ अन्य बड़े लोगों के कहने पर शिव विधायक स्वयं समाज के मंच पर आए और गतिरोध को विराम दे दिया। अच्छी पहल थी। लेकिन कल विधानसभा में भाजपाईयों को राजे से वक्त लेने व मिलवाने में जिस तनसिंह चौहान ने किरदार निभाया वो कुछ समय पहले तक समाज के एक तबके के निशाने पर थे। कल जब विधानसभा में सीएम से मिलकर बाहर आए एक वनवासी नेता को पूछा कि आप सब लोग तो उस जमाने से भाजपा के बड़े पद पर थे, जब तनसिंह चौहान पार्टी राजनीति करते ही नहीं थे, तो आपको मिलने में उनकी मदद क्यूं लेनी पड़ी? जवाब तो क्या देते लेकिन साफ बोले ये सही है कि मैडम से समय लेकर हमें मिलवाने में तनसिंह चौहान का रोल रहा।
कद घटाकर कद बढ़ाया
अब चर्चा है कि वनवासी भाजपाईयों ने अपना कद घटाकर तनसिंह चौहान का कद राजनीति में बढ़ा दिया। इतना भी तय रहा कि आज बाड़मेर से सूबे की सीएम से मिलने का जरिया भी चौहान है।
मानवेन्द्र से मेरी बात होती रहती है
शायद पुराने भाजपा नेताओं को राजनीति की बड़ी समझ न हो। ऐसे में उनका लगा कि जब हमारी उपेक्षा हो रही है तो हमारे नेता मानवेन्द्र की उपेक्षा भी सीएम करती होंगे। लिहाजा एक नेताजी ने कहा कि मानवेन्द्रसिंह को मान-सम्मान के साथ आपको बातचीत करनी चाहिए। जवाब में मैडम बोली मेरी मानवेन्द्र से अक्सर बात होती रहती है। ऐसा है ही नहीं जैसा आप कह रहे है। …अब क्या बोले।
अब ठगा कौन गया
चुनावों में उपजी रंजिश अब चुनाव आते-आते घटने लगी है। पार्टी से दूर हुए नेता जुड़ने को तैयार है तो पुराने जो पहले से हर हाल में पार्टी के साथ रहे वो अपनी वफादारी का ईनाम पाना चाहते है। अब वनवासियों की शिकायत पर वफादारों का क्या होगा? क्या शिकायत के बाद उन पर गाज गिरेगी? गैरराजपूत जिन्होंने भाजपा का साथ छोड़ जसोल परिवार का साथ दिया उनकी पैरवी कौन करेगा? वो वोटर जिसने दिल खोलकर जसोल के नाम के आगे बटन दबाया, उसका क्या?


correspondent

DesertTimes.in

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