पुलिस का सॉफ्टवेयर बनेगा और पारदर्शी, अपलोडिंग के बाद क्लिपिंग में नहीं हो सकेगा बदलाव

जयपुर। पुलिस विभाग के सॉफ्टवेयर केस दर्पण को अब और अधिक पारदर्शी एवं वास्तविक बनाया जाएगा। जांच अधिकारी अब गवाहों के बयानों की वीडियो क्लिपिंग बनाकर इसे सीआईडी सीबी के सॉफ्टवेयर केस दर्पण पर अपलोड कर सकेगा। इस सॉफ्टवेयर को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि अपलोड करने के बाद अनुसंधान अधिकारी भी चाहे तो इसमें बदलाव नहीं कर सकता। यह जानकारी अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध) पंकज कुमार सिंह ने अनुसंधान अधिकारियों की बैठक में दी। उन्होंने कहा कि अक्सर जांच अधिकारियों पर गवाह से जबरन या भय दिखाकर बयान दर्ज करने अथवा अपनी मर्जी से बयान लिख लिए जाने के आरोप लगा दिए जाते हैं। ऐसे में केस दर्पण अत्यन्त कारगर सिद्ध होगा। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से अनुसंधान अधिकारी गवाहों के बयानों की विडियो क्लिपिंग तैयार करेंगे, जिसमें गवाह अपने बयान देने से पूर्व यह स्वीकार करेगा कि वह अपने पूरे होशोहवास एवं बिना किसी दबाव के ये बयान दे रहा है। बयान लेने के बाद अनुसंधान अधिकारी इसे केस दर्पण साऍफ्टवेयर पर अपलोड करेगा, जिसे कोई भी उच्चाधिकारी देख सकेगा। अनुसंधान अधिकारियों को मोबाइल फोन भी उपलब्ध करवाये जायेंगे। इससे वे मौके पर ही गवाहों के बयानों की विडियो क्लिपिंग तैयार कर केस दर्पण पर अपलोड कर सकेंगे।


Desert Time

correspondent

Hemant Bhati

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