फसलों के अवशेष जलाने पर होगी कानूनी कार्रवाई

प्रतापगढ़। किसानों द्वारा खेतों में फसलों के अवशेष जलाए जाने पर उन्हें दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उनके खिलाफ वायु (प्रदूषण नियंत्राण एवं रोकथाम) अधिनियम 1981 की धारा 19(5) के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिला कलक्टर नेहा गिरि ने बताया कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की ओर से फसल के अवशेषों को अपने ही खेतों में जलाए जाने से होने वाले वायु प्रदूषण रोकने एवं इन अवशेषों के उचित उपयोग के लिए दिशा-निर्देश प्रदान किए गए हैं। राज्य सरकार के पर्यावरण विभाग की ओर से इन फसलों के अवशेष खेतों में ही जलाने को प्रतिबंधित किया गया है। फसल के अवशेष को खेतों में ही जलाए जाने के कारण मृदा में उपस्थित अमूल्य पोषक तत्व, लाभप्रद मित्रा सूक्ष्मजीव एवं खनिज पदार्थ जलकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे कृषि उपज एवं पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। फसल के बचे हुए अवशेष का सदुपयोग जैविक खाद बनाए जाने में किया जाकर उत्पादन बढाया जा सकता है। फसलों के अवशेष को थ्रेसर आदि मशीनों से महीन कर खेतों में बिखेरा जाकर मृदा में ह्यूमस की मात्रा बढाई जा सकती है। इन फसल अवशेष को ईंट बनाकर ईंधन के तौर पर काम में लिया जा सकता है तथा टुकड़े-टुकड़े कर मिट्टी में मिश्रित किया जा सकता है। पशु आहार के लिए इसे भूसे के रूप में भी परिवर्तित किया जा सकता है। इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति अधिनियम का उल्लंघन कर अवशेष जलाते हुए पाया जाएगा तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


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DesertTimes.in

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