वो जो करता है तो लोहा बोल उठता है वाह उस्ताद वाह

जयपुर। दोस्तों हमारा पाठकों और दर्शकों से यही वायदा है कि हम खोजेंगे देसी कलाकारों को। सूबे के कोने-कोने से। आज हम एक ऐसे आइरन मैन के बारे में आपको बताने जा रहे है जो लोह को एक ऐसी सूरत में ढ़ालते है कि वो लोह खुद बोल उठता है वाह उस्ताद वाह।

अगर आपको यह कहे कि एक लोहे के ड्रम को आप अपने ड्राइंग रूम में रख लो तो आप ऐसा करेंगे....नहीं ना लेकिन आज हम आपको जिनसे मिलवाने जा रहे वो लोह को ऐसी शक्ल दे देंते है कि उसे आप सिर्फ अपने ड्राइंग रूम में नहीं बल्कि अपने गार्डन, अपने बैड रूम यहां तक की घर के दरो दीवार के साथ कोने-कोने में सजाना चाहेंगे।

ये है जयपुर के पवन माथुर। इन्हें लोह को एक खुबसुरत शक्ल में ढ़ालने का जुनून है। अपने वर्कशॉप में ये काफी वक्त गुजारते है। इनकी कल्पना संसार अद‌भूत है। पहले ये ख्यालों में, ख्वाबों में लोह की एक तस्वीर उखेरतें है, बाद में उसे अमलीजामा पहनाने में घंटो का वक्त बीताते है। कई पांच सितारा होटलों, मैरिज गार्डन और घर के बगीचों को वो एक अलग ही रूप में निखार चुके है।

वैसे कैद, किसको अच्छी लगती है लेकिन पवन के बने पिंजरे में परिंदे भी गर्व से अपने पंख फड़फड़ाते है। पक्षियों के घर को ये इतना खुबसुरती से बनाते है कि एक बार देख लो तो नजरें वहां से नहीं हटती। आप अपने घर के गार्डन को, फार्म हाउस को या होटल के बगीचे को खिलखिलाता देखना चाहते है तो एक बार अपने ख्यालों को पंख देकर देखिए वो पवन के साथ मिलकर उड़ान भरने लगेंगे।

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