हमें पहचान लो, हम हैं देसी

– देसी कलाकारों को पहचान की दरकार
जयपुर। राजस्थान अपने कई रंगों में देश-दुनियां में अपनी एक पहचान रखता है। यकीनन यही वजह है कि सात समंदर पार से मेहमान यहां खींचे चले आते है। सूबे के हर छोटे से छोटे गांव से लेकर ढाणियों तक में ऐसे कई कलाकार छुपे बैठे है जिन्हें जरूरत है तो बस एक अदद पहचान की।
deserttimes.in ने इसे लेकर एक पहल की है ताकि सूबे के ऐसे छुपे कलाकारों को आपके सामने ला सकें। हम हैं देसी के जरिये हमारी कोशिश होगी की इन कलाकारों को एक मंच और पहचान मिले।
आज हम बात कर रहे है राजस्थान के जालोर जिले के उन कलाकारों की जो जयपुर में बांस की लाजवाब कारीगिरी करते है। गुलाबीनगरी के मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के नुक्कड़ पर डेरा डाले ये कलाकार अपने पूरे परिवार के साथ यहां रहते है। यहीं खाना, यहीं बनाना और यहीं से अपने उत्पादों को बेचना।
घर में सजाते है इनके उत्पाद
इन कलाकारों के बनाए कई उत्पाद लोग अपने घरों में सजाते है। ये मुढे, सोफे, डाइनिंग टेबल, लैंप के अलावा कई आइटम बनाते है। आलम यह है कि अब तो पड़ौसी राज्यों के लोग भी इनके बनाए उत्पाद को अपने यहां खरीद कर ले जाते है।
दिन-रात मेहनत
ये लोग यहां अपने पूरे परिवार के साथ रहते है। इनके पास रहने को पक्की छत नहीं है और न ही सोने के अच्छे बिस्तर। बावजूद इसके यहां ये लोग अपनी पूरी मेहनत से परिवार के गुजारे लायक कमा लेते है।
पहचान की दरकार
इन कलाकारों को सही पहचान की दरकार है। जाहिर है इनके पास अपने प्रोडेक्ट की मार्केटिंग करने के इतने पैसे नहीं है। ऐसे में जरूरत है तो बस इतनी की लोगों तक इनका हुनर पहुंचे। यही वजह है कि deserttimes.in ने अपने कार्यक्रम हम हैं देसी में इनको चुना। ताकि हमारे लाखों पाठकों तक इनकी कला को पहुंचा सकें।


correspondent

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