बढ़ईगिरी करते करते बनाने लगा अवैध बंदूकें…पढ़िए, किस तरह शुरू हुई औने-पौने दाम पर ऑर्डर सप्लाई

श्रीगंगानगर। पहले वह बढ़ईगिरी का काम करता था। हाथों में हुनर तो था ही, न जाने किस घड़ी बंदूक बनाने की कुबुद्धि सूझ गई। फिर क्या था, वह इस अवैध काम में जुट गया। पिछले ढाई-तीन साल में उसने सैकड़ों बंदूकें बना कर बेच दीं। शनिवार को जब पुलिस छापे के बाद हनुमानगढ़ जिले के चक 7 डीडब्ल्यूडी गांव स्थित एक मकान में चल रहे इस गोरखधंधे का पता चला तो और भी कई राज उजागर हुए। पुलिस छापे के दौरान गांव बिसरासर का चिमनाराम पुत्र मोहनलाल सुथार अवैध हथियार बनाते हुए मिला, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया। मकान की तलाशी में एक टोपीदार बंदूक, दो अर्द्धनिर्मित टोपीदार बंदूकें बरामद हुईं। बंदूकें बनाने के लिए दो नाले व कुछ अन्य पुर्जे भी मिले। इस मकान से हथोड़ी-छैणी आदि औजार भी मिले हैं, जिनसे यह बंदूकें बनाई जाती थीं। पूछताछ में चिमनाराम ने बताया कि वह अढ़ाई-तीन वर्षों से ऑर्डर पर लमछड़ व टोपीदार बंदूकें बनाने का काम कर रहा है। यह बंदूक वह अढ़ाई-तीन हजार रुपये में बनाकर दे देता है। पहले वह बढ़ईगिरी का काम करता था। पुलिस ने बताया कि मकान मालिक प्रताप बावरी मौके पर नहीं मिला। वह भी अब इस मामले में वांछित है। इसके अलावा भी कईं ओर लोग शामिल हैं, जिनके बारे में जांच-पड़ताल चल रही है।चिमनाराम को कोर्ट में पेश करने पर उसे दो दिन के रिमांड पर सौंपा गया।


correspondent

Sanjay Sethi

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