तीसरी संतान होने पर अब नहीं रुकेगी पांच वर्ष तक पदोन्नति

बीकानेर। राज्य सरकार ने राज्य कर्मियों को तीसरी संतान होने पर दिए जाने वाले दण्डात्मक प्रावधानों में संशोधन की तैयारी कर ली है। राज्य कर्मियों को तीसरी संतान पर पहले जहां पांच वर्ष तक पदोन्नति नहीं देने का प्रावधान था उसे घटाकर तीन वर्ष करने का नीतिगत निर्णय ले लिया है तथा इसके लिए नियमों में संशोधन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। यह जानकारी कार्मिक विभाग (क) के संयुक्त शासन सचिव सुनील कुमार शर्मा ने भाजपा के शहर जिला अध्यक्ष सत्य प्रकाश आचार्य को भेजे पत्र में दी है। आचार्य ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर राज्य कर्मचारियों के तीसरी संतान पर पांबदी नियमों को समाप्त करने की मांग की थी। जिसके जवाब में कार्मिक विभाग ने बताया है कि राज्य सरकार द्वारा राज्यकर्मियों के तीसरी संतान पर पाबंदी के प्रावधानों में से कई प्रावधानों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए विलोपित व संशोधित कर दिया है। जिसमें तीसरी संतान होने पर एसीपी पांच वर्ष तक ही रोकने के आदेश जारी किए जा चुके है, पहले ऐसे कार्मिकों को पूरी सेवाकाल तक एसीपी नहीं दी जाती थी। इसी प्रकार पुनर्विवाह के बाद होने वाली एक संतान के कारण निर्योग्यता से भी छूट दी जा चुकी है। इसके अलावा राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत तीसरी संतान होने पर देय दण्डात्मक प्रावधान को भी विलोपित किया जा चुका है । भाजपा शहर अध्यक्ष ने राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों के हित मे लिए गए निर्णयों को कर्मचारी हित में बताया है।


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