दुल्हन को गोद में उठा दूल्हा लेता है फेरे, दुल्हन चढ़ती है घोड़ी पर

हमारा देश परंपराओं भरा पड़ा है यहां पर कुछ दूरी पर रिति रिवाज, परंपराएं बदल जाती है, कुछ इसी तहर श्रीमाली समाज में भी विवाह में कुछ परंपाराएं है जो कुछ अलग है, पढ़ें क्या है इस समाज की परंपरा
बाड़मेर। दुल्हन गोद में और दूल्हा फेरे ले रहा है। कितना रोमांचक और रोचक दृश्य होता है। श्रीमाली समाज इस परंपरा को सदियों से निभा रहा है। आज के युग में भी इससे परहेज नहीं और अब तो आधुनिक पीढ़ी इसको लेकर क्रेजी रहती है। विवाह की रोचक परंपराएंं देशभर में है। श्रीमाली समाज की विवाह की रस्मों में इतनी रोचकताएं है कि शादी के सारे कार्यक्रम ही अलग नजर आते हैं। समाज में महिला और पुरुष की समानता की स्थिति दिखती है।
दुल्हन चढ़ती है घोड़ी पर
आम तौर पर दूल्हे को ही विवाह में घोड़ी पर चढ़ाया जाता है लेकिन श्रीमाली समाज में दुल्हन की भी बिंदौली निकलती है जो बारात आने से पहले होती है। बारात आने के बाद दुल्हन बारात ठहराव स्थल पर भी घोड़ी पर चढ़कर अपने परिजन के साथ पहुंचती है और उनको घर आने के लिए निमंत्रित करती है। बाराती उसका स्वागत करते हैं।
समधनों का परिचय भी फेरों से
बारात में महिलाओं को ले जाने से कई लोग परहेज करते हैं लेकिन श्रीमाली समाज में महिला-पुरुष और बच्चे सभी बाराती होते हैं। बाकायदा दोनों पक्षों की समधनों का आपस में परिचय पंडित की ओर से रस्म के साथ करवाया जाता है। इसमें एक दूसरे को माला पहनाने के बाद फेरे लेते हुए जोर-आजमाइश कर एक दूसरे का हाथ खींचती है। इसमें पता लगाता है कि कौन ज्यादा ताकतवर है।
विवाह मण्डप में वेशभूषा ही अलग
विवाह मण्डप में दूल्हा-दुल्हन की वेशभूषा ही अलग रहती है। दूल्हा सफेद धोती और साफा पहनकर बैठता है और महिला भी लाल किनारी की सफेद साड़ी पहनती है। सूट- बूट और पैंट यहां नहीं होते हैं।
दुल्हन को गोद में उठाकर लेते है फेरे
विवाह की रोचक परंपरा है आठ फेरे। चार फेरे सामान्य परंपरा की तरह ही होते हैं लेकिन फिर चार फेरे दुल्हन को गोद में उठाकर लिए जाते हैं। इसमें दूल्हा दुल्हन को गोद में उठा लेता है और अग्नि को साक्षी मानकर उसके चार फेरे लेता है।
महिला सशक्तिकरण का उदाहरण
श्रीमाली समाज में महिलाओं को पुरुष के बराबर अधिकार दिए गए हङ्क्ष। जमाने से महिलाओं का बारात में जाना, पुरुष के समान ही शिक्षा ग्रहण करना। सामाजिक मामलों में भी भागीदारी रही है। एेसे में अग्नि और परिजन को साक्षी मान दूल्हा यह संकल्प लेता है कि वह पत्नी को इसी तरह सम्मान के साथ रखेगा। यह महिला सशक्तिकरण का अनुपम उदाहरण कहा जा सकता है।


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