विष्णु भट्ट की पुस्तक “सीख भरी बाल कहानियां” का लोकार्पण

सृजन विविधा गोष्ठी में बौराया बसन्त
उदयपुर। युगधारा साहित्य संस्थान की मासिक सृजन विविधा गोष्ठी हिरण मगरी स्थित सेंट्रल एकेडमी विद्यालय में आयोजित की गई। अध्यक्ष लाल दास पर्जन्य ने बताया कि युगधारा के 22 कवियों ने संयोग और वियोग श्रृंगार ,छंद ,मुक्तक ,दोहा ,तैवरियों तथा गजलो से बसंत ऋतु का स्वागत किया।मधुकर की शारदे वंदना-” मैया ऐसो मोहे वर दे” तथा हेमन्त मेनारिया की रचना-“पूछो उन खामोश दरख्तों का मिजाज़ क्या है ?” से गोष्ठी का आगाज हुआ । रेणु देवपुरा ने व्यंग्य रचना-“वसीयत”, डॉ भीष्म चतुर्वेदी ने- “मधुर-मधुर मधुरम् है जीवन”, डॉ सोहन वैष्णव ने- “जिस तरह सांझ को लौटते हैं घोंसलो में पंछी”, आर . सी . देवन्द ने – हो गोरी घूमवा मत जावो दोपहरिया में”, विजय लक्ष्मी देथा ने -“सब झूठे हैं तेरे वादे , हां जी हां यह सच है “, हबीब अनुरागी ने-“गजल-“एक तेरे करीब आने से दुश्मनी हो गई जमाने से”, संस्थापक डॉ ज्योतिपुंज ने- “पेट सभी का पालते ये अलमस्त किसान”, जगदीश तिवारी ने गीत- “दीपक बनकर अंधियारा मन उजियारा से छांटाकर”, खुर्शीद नवाब ने-“सुबह का सूरज निकलने दीजिए “, भवानी शंकर गौड़ ने- “मतदानी- बसन्त”, संस्था अध्यक्ष लालदास पर्जन्य ने-” सृष्टि जब अस्तित्व में आई ,नर -मादा दो जात बनाई”, शिवदान सिंह जोलावास ने व्यंग्य- “मौसम बहुत सर्द है”, मनमोहन मधुकर ने -“कौन तुम्हारे मन को भाया ” , चेतन ओदिच्य ने- “तुम्हारी ये झुलसती हुई घोषणाएं”, आशा पाण्डे ओझा ने- “जहां पुल की जरूरत थी वहां खाई बना डाली”, किरणबाला जीनगर ने- “तुमने मुझे नहीं सुना, सुन लेते तो अच्छा था “, मंचस्थ विशिष्ट अतिथि -उमा पारीक ने- “आए शब्द शब्द मैं लेखनी सजाऊं, रागिनी मधुर अधर पै गुनगुनाऊं”, गौरीकांत शर्मा ने- “जिस्म की तो बात क्या है रूह में तरंग है”, प्रह्लाद सागर ने -” क्या चंदा क्या चांदनी , क्या तारों की जात”; मुख्य अतिथि श्याम सुन्दर भारती ने- राजस्थानी गजल- “ऐडी बात उड़ा दे लोग , तिल रो ताड़ बणा दे लोग”, आंगण में भींता खिंचवा दे, भाईयां ने लड़वा दे लोग “सुना कर खूब तालियां बटोरी। अध्यक्षता करते हुए श्रेणीदान चारण ने गीत -” अणी जगत रो रखवाळो भूखो ही सो जावे” सुनाकर गोष्ठी को परवान चढाया।
पुस्तक को लोकार्पण
बाल साहित्यकार विष्णु भट्ट की पुस्तक “सीख भरी बाल कहानियां” का लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि नाट्य-रंगकर्मी श्याम सुन्दर भारती के कर कमलों से हुआ। डॉ ज्योतिपुंज ने लेखक व पुस्तक पर चर्चा की तथा धन्यवाद ज्ञापित किया।


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