एनजीओ का अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष गिरफ्तार

आईसीआईसीआई बैंक से 33 लाख के फ्रॉड का मामला
श्रीगंगानगर। आईसीआईसीआई बैंक की श्रीगंगानगर में लक्कड़मंडी रोड शाखा से 33 लाख का फ्रॉड किये जाने के मामले में पुलिस ने मध्यप्रदेश के देवास शहर में एक गैरसरकारी संगठन के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष को गिरफ्तार किया है। इन दोनों को कोर्ट में पेश करने पर पूछताछ के लिए आठ फरवरी तक का रिमांड मिला है। इस मामले की जांच कर रहेसब इंस्पेक्टर राकेश स्वामी ने सोमवार को बताया कि देवास में ऑर्गाेनाइजेशन फॉर चिल्ड्रन एज्युकेशन एनजीओ के अध्यक्ष शाकिर अली दीप पुत्र बाबू खां और सैय्यद सादिक अली पुत्र सैय्यद हसन अली को गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों से पूछताछ के आधार पर इस फ्रॉड में शामिल अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए छापे मारे जायेंगे। फ्रॉड का यह मामला विगत एक फरवरी को दर्ज किया गया था। आईसीआईसीआई बैंक की गुड शैफर्ड पब्लिक स्कूल शाखा के उपप्रबंधक अमित गोयल की रिपोर्ट पर दर्ज किये गये
इस मामले में पुलिस ने बड़ी त्वरित कार्रवाई की। लक्कड़मण्डी रोड शाखा से लगभग 33 लाख की रकम इस एनजीओ के अकाउंट में चैक द्वारा ट्रांसफर की गई थी। इसीलिए पुलिस ने इस एनजीओ के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष को गिरफ्तार किया है। इस फ्रॉड में और भी कईं लोग शामिल हैं।
यह है मामला
आईसीआईसीआई बैंक की लक्कड़मण्डी रोड शाखा में 11 जनवरी को 18 लाख 20 हजार का एक चैक क्लियरेंस के लिए ड्रॉप बॉक्स में डाला गया था। चैक बिल्कुल
असली जैसा था। बिना किसी शक के बैंककर्मियों ने इस चैक को क्लियर कर दिया। राशि ऑर्गाेनाइजेशन फॉर चिल्ड्रन एज्युकेशन के देवास, मध्यप्रदेशमें आईसीआईसीआई बैंक के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद 18 जनवरी को इसी तरह दूसरा चैक 14 लाख 51 हजार का ड्रॉप बॉक्स से मिला। यह राशि भी इसी अकाउंट में ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद बैंक अधिकारियों के तोते उड़ गये, जब पता चला कि जिन चैकों के आधार पर यह राशि ट्रांसफर की गई है, वे चैक तो जिन फर्मांे/व्यापारियों को जारी किये गये थे, वे उनके पास सुरक्षित पड़े हैं। यह फर्मंे/व्यापारी निमराना और कोलकाता के हैं। इनको जब इनके खातों से यह रकमें निकलने का मैसेज मिला, तब उन्होंने बैंक
अधिकारियों से सम्पर्क किया था। इसके बाद अधिकारियों ने उक्त दोनों चैकों को गौर से चैक किया, तब पता चला कि यह चैक फर्जी हैं। किसी शातिर ने बिल्कुल हुबहू आईसीआईसीआई बैंक के चैक कम्प्यूटर स्कैन या किसी और तरीके से प्रिंट कर यह ठगी अंजाम दी है।


correspondent

Sanjay Sethi

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