‘एक लीजेंड थे मणि कौल‘

जयपुर। प्रसिद्ध कवि एवं निबंधकार उदयन वाजपेयी ने आज कहा कि जयपुर के फिल्म निर्माता मणि कौल हमेशा अपना ज्ञान बांटने के लिए उत्सुक रहते थे। उनके पास जो कुछ ज्ञान था, उसे बांटने की उनकी अंतहीन इच्छा थी। जवाहर कला केंद्र में चल रही मूविंग इमेज एग्जीबिषन ‘तह-सतहः ए वैरी डीप सरफेस, मणि कौल एंड रणबीर सिंह कालेका‘ के तहत वाजपेयी आज आयोजित की गई टॉक को सम्बोधित कर रहे थे। यह टॉक ‘लाइफ विद मणि- एन इवनिंग ऑफ पोएट्री, म्यूजिक एवं आईडियाज‘ विषय पर आयोजित की गई। वाजपेयी ने आगे बताया कि मणि कौल के प्रकृति प्रदत्त ज्ञान को ‘दाता‘ फिल्म में भी देखा जा सकता है, जो जेकेके में चल रही एग्जीबिषन में प्रदर्षित की जा रही है।
वाजपेयी जो कि तीन दषक से अधिक समय तक मणि कौल के विद्यार्थी रहे ने मणि कौल के जीवन पर प्रकाष डालते हुए कहा कि वे ना सिर्फ एक महान फिल्म निर्माता थे, बल्कि संगीतकार और कवि भी थे। कौल ने अनेक छात्रों को ध्रुपद सिखाया था, जिनमें वे स्वयं (वाजपेयी) भी शामिल थे। उदयन ने मणि कौल की कविताओं, संगीत एवं उनके आपसी करीबी संबंधों के बारे में भी बात की। वाजपेयी ने आगे बताया कि मणि महान शिक्षक भी थे और अपने स्टूडेंट्स में गलतियां नहीं ढूंढते थे। वे स्टूडेंट्स की गलतियों के माध्यम से स्टूडेंट्स के व्यवहार को मापते थे। कौल की कला पर प्रकाश डालते हुए वाजपेयी ने कहा कि मणि कौल ने लोगों को समय की गति का अनुभव करने के लिए अपनी कला के सभी रूपों में समय को स्पष्ट दर्षाने का प्रयास किया था। समय की गति का अनुभव करते हुए कोई भी रूपात्मकता का अनुभव भी कर सकता है। उन्होंने आगे कहा कि मणि कौल की कविताओं में ‘श्रृंगार‘ तत्व है, जो मनुष्य व प्रकृति के सातत्य को दर्षाता है। इस अवसर पर वाजपेयी ने मणि कौल की कुछ अंग्रेजी कविताएं भी सुनाई।


Desert Time

correspondent

Hemant Bhati

Hemant Bhati

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