बसायें ऐसा एक संसार… युवा कवि मुकेश की रचना

मुकेश बोहरा अमन

बसायें ऐसा एक संसार,
करें सभी से प्यार,
बसायें ऐसा एक संसार।
कि मानव.. ओहो…, कि मानव आहा….,
कि मानव गाता रहे बस प्यार, प्यार, प्यार।।
सब जन मंगल-मंगल पायें,
और मन मंगल-मंगल गायें,
आपस में स्नेह भरे और,
बंद हो शोषण का व्यापार।
कि मानव.. ओहो…, कि मानव आहा….,
कि मानव हंसता रहे हर बार, बार, बार।।
बसायें ऐसा….. ।। 1 ।।
जांति-पांति के बन्धन सारे,
टूट-टूट हो चन्दन सारे,
धर्म बने जीवन की रोशनी,
रामराज फिर हो जाएं साकार।
कि मानव.. ओहो… , कि मानव आहा ….,
कि मानव रम जाएं इस द्वार द्वार, द्वार।।
बसायें ऐसा ……………. ।। 2 ।।
स्वर्ग धरा पर सबके सम्मुख,
सत्य, अहिंसा को सब उन्मुख,
मानव देव-देवियों जैसा,
फिर तो हो जाएं उद्धार।
कि मानव.. ओहो…, कि मानव आहा….,
कि मानव तिर जाएं उस पार, पार, पार।।
बसायें ऐसा ……………. ।। 3 ।।


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