फिर लग जाती भूख… युवा कवि मुकेश अमन की रचना से

मुकेश बोहरा अमन

भूख

भूख मिटाते दिन कट जाता,
फिर लग जाती भूख।
रोज सवेरा होते होते,
फिर जग जाती भूख।
सुबह नाष्ता लेकिन दोपहर,
फिर उग आती भूख।
सायं को ‘बेपारा करते,
फिर पग पाती भूख।
और रात को ‘डिनर के संग,
फिर छूप जाती भूख।
भूख मिटाते, भूख छिपाते,
फिर बढ़ जाती भूख ।।


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