नसबंदी घोटाले में डॉ. रेणु सेतिया गिरफ्तार…कौन है ये डाक्टर, क्या किया…जानने के लिए देखें

एसीबी कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा
श्रीगंगानगर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 13 वर्ष पुराने नसबंदी घोटाले में हनुमानगढ़ की एक प्राइवेट डॉक्टर रेणु सेतिया को गिरफ्तार कर लिया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की श्रीगंगानगर स्थित विशेष अदालत में पेश किये जाने पर डॉ. रेणु सेतिया को 15 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस घोटाले में डॉ. रेणु सेतिया के पति डॉ. अमर सेतिया सहित तीन अभियुक्तों की पांच माह पहले गिरफ्तारी की गई थी। यह तीनों फिलहाल जमानत पर रिहा हैं। ब्यूरो की हनुमानगढ़ में स्थित चौकी के प्रभारी, अवर एसपी सहीराम बिश्रोई ने बताया कि डॉ. रेणु सेतिया ने इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए जोधपुर हाईकोर्ट तक में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। बुधवार को डॉ. रेणु सेतिया के हनुमानगढ में अपने प्राइवेट नर्सिंग होम में होने का पता चलने पर उसे वहां से गिरफ्तार कर लिया गया। शाम को डॉ. रेणु सेतिया को ब्यूरो की टीम श्रीगंगानगर लेकर आई और कोर्ट में पेश किया। अवर एसपी बिश्रोई ने बताया कि इससे पहले 12 अगस्त 2016 को अमर सेतिया, सेवानिवृत्त लैब तकनीशियन प्यारेलाल तथा एक गैर सरकारी संस्था-ग्रामीण विकास सेवा संस्थान (एनजीओ) के सचिव सुभाष बेनीवाल को गिरफ्तार किया गया था। इन तीनों की बाद में जमानत हो गई थी।
कब का मामला
यह नसबंदी घोटाला वर्ष 2004-05 का है, जिसमें नसबंदी किये ऑपरेशनों में आंकड़ों में हेराफेरी कर सरकारी कोष को लाखों का नुकसान पहुंचाया गया था। इसमें डॉक्टर दम्पत्ति और प्यारेलाल पर छह लाख से भी अधिक की राशि तथा सुभाष बेनीवाल पर 76 हजार 450 रुपये का गबन करने का आरोप ब्यूरो की जांच में सही पाया गया था।
यह है पूरा मामला

ब्यूरो के सूत्रों के मुताबिक परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत सरकारी-गैर सरकारी अस्पतालों में नसबंदी ऑपरेशन करवाने वाली महिलाओं व पुरुषों को केन्द्र-राज्य सरकारों की एक योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह राशि निजी अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन करवाने वालों या आयोजित किये जाने वाले शिविरों में ऑपरेशन करवाने वालों को भी नियमानुसार दिये जाने का प्रावधान है। वर्ष 2004-05 में हनुमानगढ़ जिले मेें इस योजना के तहत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग कार्यालय को अच्छा-खासा बजट मिला था। योजना में नियम था कि विभाग के अधिकारी आयोजित किये जाने वाले शिविरों में मौके पर जाकर नसबंदी करवाने वालों को अपने सामने प्रोत्साहन राशि दिलवायें। बाकायदा इसके वाऊचर पर नसबंदी करवाने वाले के हस्ताक्षर करवाये। हनुमानगढ़ में तत्कालीन विभाग के अधिकारियों ने इस नियम की अनदेखी कर दी। राशि वितरण का जिम्मा सरकारी अस्पताल के एक लैब तकनीशियन प्यारेलाल शर्मा को दे दिया गया। उसने साढ़े 6 लाख रुपये विभाग के खाते से इस मद में निकलवा लिये। इस राशि का खुद ही निजी अस्पतालों में लगे शिविरों में न जाकर, बाद में सीधे उनके संचालक डॉक्टरों को दे दिये। नसबंदी के फर्जी आंकड़े और वाउचर बनाये गये। ब्यूरो सूत्रों के मुतबिक वाउचर पर न तो किसी के सही हस्ताक्षर थे और न ही कोई सील मोहर लगाई गई। कहीं से भी नहीं लगता था कि यह सरकारी वाउचर है। ऐसे लोगों के नाम वाउचर बनाये गये, जिन्होंने या तो नसबंदी करवाई ही नहीं थी, या फिर उनके नाम का कोई व्यक्ति था ही नहीं। इस तरह प्राइवेट डॉक्टरों में साढ़े 6 लाख रुपये की बंदरबांट कर दी गई। विभाग के अधिकारियों ने इसको चैक तक नहीं किया।

फर्जीवाड़े पर ईनाम राशि
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के इस घपले का एक बेहद रौचक व दिलचस्प तथ्य भी है। ब्यूरो के सूत्रों के अनुसार जांच-पडताल में यह तथ्य सामने आया कि जिन निजी डॉक्टरों के यहां नसबंदी के फर्जी ऑपरेशन दिखाकर और फर्जी वाउचर बनाकर पूरे फर्जी आंकड़े तैयार किये गये। उन्हें इन्हीं आंकड़ों के आधार पर राज्य सरकार से एक-एक लाख की ईनाम राशि और दिलवा दी। विभाग की ओर से नसबंदी ऑपरेशन के पेश किये गये आंकड़ों को जिला कलक्टर कार्यालय ने ईनाम की अनुशंसा के साथ आगे राज्य सरकार को भिजवा दिये। एक-एक लाख की यह ईनाम राशि डॉ. अमरलाल सेतिया और सुभाष बेनीवाल के एनजीओ को दिलवाई गई। इस तरह यह कुल मिलाकर घपला साढे 8 लाख रुपये का किया गया।
कईं बार बदली गई जांच
वर्ष 2004-05 के वित्त वर्ष की समाप्ति के कुछ ही दिनों बाद ब्यूरो को इस घपले की भनक अपने सूत्रों से चली थी। सूत्र सूचनाओं के आधार पर ब्यूरो ने गोपनीय रूप से जांच की। एक रिपोर्ट तैयार कर जयपुर अपने मुख्यालय को भेजी। मुख्यालय ने इसकी विस्तृत जांच के आदेश दिये। यह जांच चार वर्ष तक चलती रही। वर्ष 2008 में प्राथमिकी जांच के बाद ब्यूरो मुख्यालय में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया। ब्यूरो सूत्रों ने बताया कि केस में तत्कालीन एसीएमएचओ (परिवार कल्याण) डॉ.सुरेश अग्रवाल, बॉम्बे हॉस्पीटल के संचालक डॉ. अमरलाल सेतिया, लैब तकनीशियन प्यारेलाल शर्मा तथा एनजीओ के संचालक सुभाष बेनीवाल को नामजद किया गया। अन्य लोगों को भी सन्देह के घेरे में रखा गया। 2008 में केस दर्ज हो जाने के बाद इस घपले की जांच बार-बार बदलती रही। इसी कारण गिरफ्तारियों में इतना विलम्ब हुआ। इस दौरान डॉ. अग्रवाल और प्यारेलाल शर्मा सेवानिवृत्त हो गये। डॉ. अग्रवाल की हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत हो गई थी।


correspondent

Sanjay Sethi

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