हैकिंग से अब मानवीय जीवन को भी खतरा

हैकर्स पेसमेकर में गड़बड़ कर ले सकते हैं जान, एस.डी. लॉ पीजी कॉलेज में साइबर क्राइम पर वर्कशॉप
श्रीगंगानगर। दुनिया में हैकिंग अब जान तक ले लेने के मुकाम पर पहुँच गई है। अभी तक हैकर कम्प्यूटरों में घुसपैठ कर इकनॉमिक और सोशल क्राइम भी कर रहे थे या फिर ज्यादा से ज्यादा आतंकवादी घटनाओं तक को अन्जाम दे देते थे। लेकिन अब हैकर व्यक्तिगत मानवीय जीवन को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। ऐसा इसलिये संभव है, क्योंकि चिकित्सकीय उपकरण बनाने वाली कम्पनियाँ पेसमेकर तक में आईपी चिप लगा रही हैं। यह चिप डाक्टर की सुविधा के लिये लगाई जाती है ताकि जिस किसी के भी आईपी पेसमेकर लगाया गया हो, उसके दिल की धड़कनों तथा शरीर की अन्य व्याधियों की जानकारी डॉक्टर अपने कम्प्यूटर द्वारा एक विशेष सॉफ्टवेयर से कभी भी चैक कर सकता है। यही नहीं इस सॉफ्टवेयर से डॉक्टर अपने कम्प्यूटर से ही मरीज की धड़कन को नियंत्रित भी कर सकता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में यह एक नया आयाम है लेकिन इसमें घुसपैठ कर हैकर किसी की भी जान ले सकते हैं। एस.डी. पीजी लॉ कॉलेज में साइबर क्राइम पर आयोजित की जा रही वर्कशॉप के बुद्धवार को दूसरे दिन यह महत्वपूर्ण जानकारी दिल्ली से आये एथिकल हैकर एवं साइबर क्राइम एक्सपर्ट श्री संदीपसिंह ने तकनीकी सत्र में ही उन्होंने बताया कि अमेरिका जैसे देश भी इस तरह की हैकिंग को रोक पाने में असमर्थ हैं। हैकर न केवल हैकिंग से पेसमेकर में घुसपैठ करते हुए लोगों के दिलों की धड़कन से छेड़छाड़ कर सकते बल्कि उनमें लगे पेसमेकर के आईपी का फर्जी आईपी बनाकर इन्श्यारेन्स कम्पनियों से क्लेम के रूप में पैसा भी प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे आईपी युक्त पेसमेकर अब भारतीय बाजार में भी उपलब्ध होने लगे हैं। श्री संदीपसिंह ने बताया कि आमतौर पर अवधारणा है कि हैकर किसी के भी कम्प्यूटर में घुसपैठ कर उसका सारा डाटा चुरा लेते हैं या उसमें कोई और गड़बड़ कर देते हैं लेकिन सच यह है कि हैकर तब तक किसी के कम्प्यूटर में नहीं घुस सकता जब तक उस कम्प्यूटर को ऑपरेट करने वाला इसकी इज़ाज़त न दे। यह इज़ाज़त कम्प्यूटर ऑपरेटर की असावधानी या अज्ञानता की वज़ह से मिलती है। कम्प्यूटर पर बेतहाशा ई-मेल आते हैं। इनमें संदिग्ध ई-मेल भी होते हैं। संदिग्ध ई-मेल को खोलने में सावधानी बरतनी चाहिए।


correspondent

Sanjay Sethi

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