पेड़ों को बचाने की  अनूठी मुहिम का जिलेभर में हुआ भव्य शुभारंभ  

आदिवासी अंचल ने दिया पुराने पेड़़ों को बचाने का अनूठा संदेश
डूंगरपुर जिले की 291 ग्राम पंचायतों ने ‘मदर ट्री’ का किया चयन
डूंगरपुर. आदिवासी अंचल डूंगरपुर जिले ने अपनी सदियों पुरानी नैसर्गिक विरासत को सहेजने और संरक्षित करने की दिशा में बुधवार को एक अनूठा संदेश देते हुए जिले के दो शहर मुख्यालयों सहित 291 ग्राम पंचायतों मंे सबसे पुराने पेड़ को ‘मदर ट्री’ (जननी वृक्ष) के रूप में चयन किया। जिला कलक्टर सुरेन्द्र कुमार सोलंकी की पहल पर प्रारंभ की गई अनूठी मुहिम के तहत बुधवार को जिले भर में आयोजित ग्राम सभाओं मे ग्रामीणों पूरे उत्साह के साथ ‘मदर ट्री’ का चयन किया और इनके संरक्षण के लिए अपनी श्रद्धाआंे की अभिव्यक्ति की।
कलेक्ट्रेट के वट वृक्ष को मिला ‘मदर ट्री’ का गौरव:
‘मदर ट्री’ चयन के लिए जिला स्तरीय समारोह कलेक्ट्रेट के पीछे स्थित लगभग सौ साल पुराने वटवृक्ष के पास आयोजित किया गया। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. राजीव पचार के आतिथ्य में आयोजित इस समारोह में वटवृक्ष को ‘मदर ट्री’ घोषित करते हुए इस पर चयन की पट्टिका लगाई गई। एसपी राजीव पचार ने पेड़ों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के इस अनूठे अभियान को अनुकरणीय बताया और कहा कि इस माध्यम से हम जीवनदायिनी प्रकृति के उपकार से उऋण हो सकते हैं।
इस दौरान एसपी राजीव पचार, अतिरिक्त कलक्टर भोजकुमार, जिला परिषद सीईओ वृद्धिचंद गर्ग, आदि ने पं. हरिप्रसाद दवे के आचार्यत्व में वटवृक्ष का पूजा-अर्चना करते हुए ‘मदर ट्री’ का गौरव प्रदान करते हुए आभार अभिव्यक्ति की। इस दौरान वटवृक्ष की परिक्रमा भी की गई और मौजूद लोगों को इस वटवृक्ष के संरक्षण का संकल्प भी दिलाया गया। समारोह में एसीएफ धनपतसिंह, क्राईम ब्रांच निरीक्षक मनोज सामरिया, पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक वीरेन्द्रसिंह बेड़सा, डूंगरपुर बर्ड्स संस्थान के रुपेश भावसार, नायब तहसीलदार नाथूलाल यादव, योगेश चौबीसा, हेमेन्द्र चौबीसा, देवचंद यादव, सहायक परियोजना अधिकारी भूपेन्द्रसिंह देवला, शीतल मेनारिया, जगदीश पहाड़, धु्रव साद, पर्यावरण प्रेमी राकेश राय सहित कलेक्ट्रेट परिसर के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन मौजूद थे।
गाजे-बाजे के साथ गांवों में भी हुआ‘मदर ट्री’ का चयन:
अभियान के तहत जिले की समस्त 291 ग्राम पंचायतों में  ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया और ग्राम सभा की बैठक मंे गांव के सबसे पुराने वृक्ष का ‘मदर ट्री’ के रूप में चयन का प्रस्ताव लिया गया। प्रस्ताव के तहत मदर ट्री’ के चयन के साथ उसके संरक्षण, ‘मदर ट्री’ के आसपास स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने, वृक्ष की जड़ों में कचरा एवं अपशिष्ट डाले जाने पर होने वाली पाबंदी, वृक्ष को काटने, तोड़ने, छांटने अथवा नुकसान पहुंचाने पर पाबंदी का उल्लेख करते हुए ग्राम पंचायत द्वारा इसको संरक्षित वृक्ष के रूप में प्रस्तावित किया गया। कई ग्राम पंचायतों मंे ढोल ढमाकों के साथ ग्रामीण चयनित ‘मदर ट्री’ के पास पहुंचे और इसकी पूजा-अर्चना और परिक्रमा करते हुए इनके संरक्षण का संकल्प लिया। जिले में कई स्थानों पर वृक्षों पर केसर छांटा भी किया गया और इसे पवित्र और पूजनीय वृक्ष घोषित करते हुए अन्य ग्रामीणों को इसके संरक्षण का आह्वान किया।
आकर्षक लोगो ने दिया संदेश:
‘मदर ट्री’ चयन करने की मुहिम के तहत विशेष रूप से तैयार किया गया लोगो आज दिनभर सोशल मीडिया में भी आकर्षण का केन्द्र रहा। इस आकर्षक लोगो की डिज़ाईन शहर के ख्यातनाम चित्रकार रूपेश भावसार द्वार की गई है जिसमें एक जननी को हरे-भरे पेड़ के रुप में दर्शाया गया है और इसके संरक्षण का संदेश दिया गया है। आज इस मुहिम के तहत अभियान से जुड़े और पर्यावरण प्रेमियों के साथ कई युवाओं ने इस लोगो को व्हाट्सअप पर अपनी डीपी बनाकर पेड़ों के संरक्षण के प्रति अपनी आस्थाएं प्रदर्शित की।
…अब ये करना होगा:
जिला कलक्टर सोलंकी ने बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि चयनित मदर ट्री की सूची जिला मुख्यालय भेजी जावे और इस सूचना को ग्राम पंचायत के अटल सेवा केन्द्र की दिवार पर भी लिखवाया जाए। इसी प्रकार जिला सूचना विज्ञान केन्द्र द्वारा चयनित मदर ट्री की सूची को जिले की वेबसाईट पर भी प्रदर्शित किया जाएगा। ‘मदर ट्री’ को संरक्षित करने के लिए इसके चारों तरफ कच्ची चुनाई करते हुए चबूतरा बनाकर सुरक्षा के प्रयास करने को भी कहा गया है और बताया गया है कि यह भी ध्यान रखा जाए कि चबूतरे के उपर का फर्श कच्चा ही रहे तथा इस पर गोबर से लिपाई-पुताई की जावे। चबूतरे के आसपास साफ-सफाई भी की जावे ताकि लोग इस पेड़ की छाया में बैठ सके।
विशिष्ट अवसरों पर होगी आभार अभिव्यक्तिः
कलक्टर ने बताया कि चयनित मदर ट्री को प्रतिवर्ष विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून), विश्व पृथ्वी दिवस (22 अप्रेल), विश्व वानिकी दिवस (21 मार्च) आदि दिवसों पर जीवनदायी वृक्षों के सम्मान स्वरूप आभार व्यक्त करने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और इस दौरान पेड़ पर जनजाति अंचल की परंपरा के अनुसार केसर छांटा करते हुए इनका पूजन किया जाएगा। इस मौेके पर इसके नीचे चौपाल का आयोजन करते हुए इसी प्रकार के अन्य वृक्षों के संरक्षण की कार्यवाही भी की जाएगी।

correspondent

DesertTimes.in

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