श्रद्धालुओं ने सांवलिया धरती को बनाया बिछोना

दर्शनों के लिए मंगला आरती के समय से ही लंबी कतारें

मण्डफिया (सांवलियाजी) .मंदिर के विभिन्न परिसरों में कल सोमवार को जहां कवि-सम्मेलन, भजन संध्या, आर्केस्ट्रा के कार्यक्रम हुए वहीं उसी स्थल और भूमि को श्रद्धालुओं ने बिछौना बना रात्रि विश्राम किया। इस पवित्र स्थल की धरती ही उनके विश्राम के लिए मुलायम दरी का बिछौना और आसमान ओढ़ने की गर्म चादर थी। पूरे मन्दिर परिसर के आजू-बाजू हजारों हजार स्त्री-पुरूषों ने खुले आकाश के नीचे रात्रि विश्राम किया और मंगला आरती के साथ ही भगवान साँवलियाजी के दर्शन के लिए बड़ी-बड़ी कतारें लग गई। इस बार मन्दिर में प्रवेश नव निर्मित हो रहे भव्य मुख्य द्वार से हुआ।गोवर्घन बस स्टेण्ड मेला मंच पर कल सोमवार रात्रि को भव्य सांस्कृतिक संध्या की शुरूआत ‘सा रे गा मा पा’ की फेम और डी डी नेशनल पर भारत की शान कार्यक्रम की विजेता शिल्पी पाल की नृत्य प्रस्तुति से हुआ। उनकी धमाकेदार प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया और समूचा पाण्डाल तालियों की गड़गड़ाहट से देर तक गूंजता रहा। पाल के साथ बाॅबी डान्सर ग्रुप के साथी कलाकारों ने प्रस्तुतियों को बहुत रोमांचक बना दिया। वालीवुड इंवेट परफोरमर पलक के ऊर्जा भरे नृत्य को देख कर दर्शक भावविभोर हो गए। लाफ्टर चेलेंज फेम उदय भैया की प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी और देर तक गुदगुदाया। ये प्रस्तुतियां दीप इंवेंट की थी और इनका सफलतापूर्वक संचालन नेहा शर्मा ने किया।इसी मंच पर मध्यरात्रि पश्चात न्यू राजस्थान आरकेस्ट्रा ग्रुप की भजन प्रस्तुतियांे और नृत्यों ने भी दर्शकों और श्रोताओं को बांधे रखा। इस कार्यक्रम की शुरुआत टी सीरिज के गायक नरेन्द्र अलबेला एवं मध्य प्रदेश से आई दीप्ति भटनागर द्वारा गाये राम भजन से हुई। उनके मधुर स्वरों ने पाण्डाल को भक्ति रस से सरोबार कर दिया।प्रिंस डांस ग्रुप दिल्ली द्वारा दी गई प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने खूब ठुमकेे लगाए। राजस्थानी कलाकार सोनू मेवाड़ी ने 351 कलश सिर पर रख कर भवाई नृत्य की नायाब प्रस्तुति दी। उनके संतुलन और सामंजस्य को देख दर्शक दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो गए। इस कार्यक्रम में जोधपुर से आये सुन्दर अलबेला ने दर्शकों को हंसा-हंसा कर उनकी थकान उतार दी और वे लोटपोट हो गए।प्रारंभ में इस मंच पर मंदिर मण्डल अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा ने दीप प्रज्वलन कर सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया। उनके साथ मंदिर मण्डल के सदस्य भैरू लाल सोनी, मदन व्यास, विजय सिंह ,भैरू लाल गाडरी तथा गेहरी लाल और मण्डफिया के गणमान्य लोग उपस्थित थे।मेले के पहले दिन सोमवार रात्रि को रेफरल अस्पताल परिसर के मंच पर आयोजित यादगार कवि सम्मेलन में प्रस्तुत कविताओं ने श्रोताओं को हंसाया, रूलाया और झकझोर दिया। विशाल जन समुदाय कवियों की प्रस्तुतियों को दत्तचित्त हो कर कानों के रास्ते दिल में उतार कर काव्य रस में खो गया। खचाखच भरे पाण्डाल की नीरव शांति और तालियों की गड़गड़ाहट ने प्रस्तुतियों को मूल्यवान और असरदार बना दिया।अपनी वीरोचित स्वभाव के अनुसार मेरठ से आए वीर रस के प्रख्यात कवि हरिओम पंवार ने देश के दुश्मनों को ललकारा और उन्हें नेस्तनाबूद करने का आह्वान किया। उन्होंने पाकिस्तान की निर्लज्जता और क्रूरता को इंगित करते हुए कहा – ‘पत्थरों की आँखों में नमी नहीं मिलती’। प्रेम के बदले नफरत बरसाने की फितरत पर उनका कहना था कि ‘हम कस्तूरी खोज रहे हैं उल्लू की परछाई में’। उन्होंने जब भारत की स्थिति पर पंक्तियां सुनाई कि ‘‘ पीपल छाया मांग रहा हैं, यूं कीकर के पेड़ों से। जैसे कोई शेर सुरक्षा मांग रहा हो भेड़ों से’’ ये पंक्तियां सुनाई तो जनता ने तालिया बजा कर ओज के हस्ताक्षर हरिओम पंवार को आंखो पर उठा लिया। देश के प्रसिद्ध मंच संचालक और नव रस के कवि सत्यनारायण सत्तन ने अपने चुटिले अन्दाज में व्यंग्य करते हुए देश की स्थिति और वर्तमान समाज की दशा पर कटाक्ष किए। उन्होंने सभी धर्मों की प्रार्थनाओं के साथ विविधता में एकता का चित्र प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को जमकर गुदगुदाया। वर्तमान मीडिया पर पंक्तियां सुनाते हुए कहा कि ‘‘ये अखबार वाले – ये अखबार वाले, ये इस पार रह कर भी उस पार रहने वाले कविता पर जम कर दाद मिली।

ख्यात नाम गीतकार और श्रृंगार के विशिष्ट कवि विष्णु सक्सेना के मधुर प्रेम गीतों ने श्रोताओं के कानों में मिश्री घोल दी। उनकी प्रसिद्ध कविता ‘‘रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं। तुमने पत्थर का दिल हमको कह तो दिया, पत्थरों पर लिखोगे मिटेगा नहीं’’। पर श्रोता मानो गीतकार के साथ एकाकार हो गये। उनके गीतों पर कई बार ‘‘वंस मोर-वंस मोर’’ के मांग उठी। अनामिका अम्बर ने अपने प्रेरक गीतों के माध्यम से श्रोताओं का गहराई से उद्बोधन किया। अतुल ज्वाला और बलवन्त बल्लू ने सम सामयिक मुद्दों को व्यंग्य की पैनी धार के सहारे प्रस्तुत करके श्रोताओं को गुदगुदाया तो है ही उन्हें तिलमिलाने पर भी मजबूर कर दिया। प्रेरणा ठाकर ने फिल्मी गीतों पर बनी पैरोडियों के माध्यम से वर्तमान राजनीति की खूब खबर ली। उनका कहना था कि ‘‘केजरिए झाड़ूवाला हाय रे समस्याओं की दुनिया वाला’’। कवि सम्मेलन में कैलाश मण्डेला ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन का संचालन शंकर सुखवाल ने किया। कवि सम्मेलन के प्रारम्भ में मुख्य अतिथि चित्तौड़गढ़ के सांसद सी.पी जोशी, कपासन विधायक अर्जुन लाल जीनगर ,चित्तौड़गढ़ विधायक चन्द्रभान सिंह आक्या, बड़ीसादड़ी विधायक गौतम दक, बेंगू विधायक एवं भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश धाकड़ सहित सांवरिया मंदिर मण्डल के अध्यक्ष और समस्त सदस्यों ने मा सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर कवि सम्मेलन का प्रारम्भ किया। उन्होंने कवियों का उपर्णा और प्रसाद भेंट कर स्वागत किया।सोमवार रात्रि को मंदिर परिसर के सामने स्थित मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रारंभ प्रसिद्ध गायिका तृप्ति शाक्या के प्रभावकारी गणेश वन्दना भजन से हुआ। गायिका के गायन के साथ नृत्यरत्त भाव-भंगिमाओं ने जल्दी ही श्रोताओं को अपने रंग में रंग लिया। उसके बाद उनकी एक ओर जोरदार प्रस्तुति ने तो श्रोताओं को आनन्द के सागर में डूबो दिया।जब उन्होंने ‘वाह ! वाह ! क्या बात है-सांवरियां रो साथ है‘ को गाया तो भक्त जन भी उनके साथ गाते-गाते झूम उठे। उनकी एक बेहतरीन प्रस्तुति ‘‘राधा संग नाचे गोपाल’’ ने तो दर्शकों को वृन्दावन की गलियों की सैर करवा दी। इस प्रस्तुति के दौरान नर्तकों के दल ने राधा-कृष्ण, गोप-गोपियों का रूप धर कर चित्ताकर्षक नृत्य की प्रस्तुति दी। नृत्य के दौरान नर्तकों का अंग संचालन, पुष्प वर्षा और मयूर पंखों की सजावट समूचे वातावरण को मन्त्र मुग्ध कर गई। नृत्य के दौरान नर्तकों द्वारा अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुरेश चन्द्र एवं अन्य गणमान्य अतिथियों को भी नृत्य के लिए मनुहार करना सभी को आनन्दित कर गया। तृप्ति ने श्रोताओं की मांग पर अपना प्रसिद्ध भजन ‘‘कभी राम बनके कभी श्याम बनके’’ भी गाया। लाफ्टर चेलेंज प्रथम के विजेता सुनील पाल ने अपने पंचो और विशिष्ट अदाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। कनिका शर्मा एवं नेहा शर्मा द्वारा प्रस्तुत किए भजन लोगों के मन को खूब भाए। ट्वींकल शर्मा , महेश गोयल, सुरभि के दल ने फिल्मी गीत, भजन और नृत्य के सहारे लोगों का मनोरंजन किया। ‘सा रे गा मा फेम ’’ ट्वींकल शर्मा ने दीवाना राधे का गा कर लोगों को नाचने पर मजबूर कर दिया।


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