अरहर ने जगाई नई उम्मीदें, बिजाई शुरु

-जिले में पहली बार टारगेट रख कृषि विभाग करवा रहा है बिजाई
श्रीगंगानगर। प्रदेश में कभी नरमा-कपास काविकल्प मानी गई ग्वार की खुद आर्थिक सेहत बिगडऩे के बाद किसानों के लिए अरहर नई उम्मीद के रुप में सामने आई है। कम पानी-लागत के बावजूद बेहतर उत्पादन-दाम देने के कारण अरहर आज किसानों की पहली पसंद बनी हुई है। संभवत: इसी वजह से कृषि विभाग द्वारा जिले में पहली बार टारगेट रखते हुए अरहर की बिजाई करवाई जा रही है।
जिले में पूर्व के वर्षांे मेंं किसान अरहर की बिजाई करते रहे हैं, लेकिन कभी इसकी टारगेट रखकर बिजाई नहीं हुई। इस वर्ष पहली बार विभाग ने अरहर की 5000 हैक्टेयर में बिजाई का लक्ष्य रखा है, जिसके आसानी से पूरा होने की उम्मीद विभाग के अधिकारियों को है। हालांकि अधिकारियों ने जून के पहले पखवाड़े को उपयुक्त समय बताते हुए अरहर बिजाई की सिफारिश की है, लेकिन उत्साहित किसानों ने इसकी बिजाई शुुरु भी कर दी है। अब तक 106 से अधिक हैक्टेयर में अरहर की बिजाई हुई है, जिसके जून मेें लक्ष्य से अधिक होने की उम्मीद है।
कम लागत-पानी में कई गुना मुनाफा
कृषि अनुसंधान अधिकारी (शस्य) डॉ. मिलिन्द सिंह का मानना है कि अरहर कम लागत-पानी में कई गुना तक मुनाफा देेने वाली फसल है। ग्वार के मुकाबले अरहर की खेती में लागत लगभग बराबर लेकिन मुनाफा कई गुना अधिक है। नरमा-कपास की तुलना में तो अरहर बेहद उपयोगी है। फिलहाल ग्वार के भाव 30 रुपए प्रतिकिलो के आसपास हैं जबकि अरहर की दाल के दाम 200 रुपए हैं। सिंह ने बताया कि दक्षिण भारत के राज्यों में तो अरहर व्यंजनों की जान है। इडली, डोसा से लेकर उपमा सहित कई तरह के व्यंजनों में अरहर की दाल इस्तेमाल में लाई जाती है।
क्यूं खास बनी है अरहर
-पहला कारण भाव। मौजूदार दाम 200 रुपए प्रति किलो।
-नरमा-कपास के मुकाबले आधे से भी कम लागत।
-नरमा-कपास की तुलना में आधा सिंचाई पानी।
-ग्वार के बराबर लागत, लेकिन मुनाफा दस गुना तक ज्यादा।
-ग्वार की तरह खेत की जमीन के लिए उपयोगी।
-कम नाइट्रोजन में अधिक पैदावार।
-बीटी कॉटन के 4 बीघे में 150 किलोग्राम की आवश्यकता जबकि अरहर में सिर्फ 20 किलोग्राम।
वर्शन है-
प्रदेश में अरहर की खेती नरमा-कपास के विकल्प के तौर पर सामने आई है। ग्वार से किसानों को उतना फायदा नहीं हुआ, इसलिए उनका रुझान अरहर की ओर बना है। नीलगाय और खेतों में कीटनाशक के प्रकोप को नियंत्रित कर किसान अरहर से मुनाफेदायक उत्पादन ले सकते हैं।
-डॉ. मिलिन्द सिंह
अनुसंधान अधिकारी (शस्य)

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