34 साल बाद रिकॉर्ड में दर्ज हुआ सही नाम

जिन्दगी को आसान बना रहे न्याय आपके द्वार शिविर, 

एक ही छत के नीचे बँट रहा सुकून

उदयपुर.        कोशिश तो उसने खूब की थी, बरसों लग गए फिर भी कुछ न हो पाया। निराशा के भँवर में जाने कब से इधर-उधर चक्कर काटता रहा। केवल एक शब्द की त्रुटि की वजह से उसे इतनी परेशानी होती रही कि वह निराश हो उठा।

इस बीच राज्य सरकार का राजस्व लोक अदालत अभियान न्याय आपके द्वार आ पहुंचा जिसने उसकी सारी निराशाओं को तोड़ कर आशाओं का संचार ही नहीं किया बल्कि उसका मनचाहा काम हो गया।

बरसों बाद अपनी मुराद पूरी हो जाने से खुश यह आदिवासी काश्तकार भाव-विभोर हो उठा और सरकार के प्रति धन्यवाद के दो शब्द बोलते हुए उसकी आँखों में खुशी के आँसू छलक आए।

यह बात है उदयपुर जिले के सलूम्बर उपखण्ड क्षेत्र के उथरदा की, जहाँ खाते में अपना नाम 34 साल बाद दुरस्त होना उसके लिए किसी मुँहमांगे  वरदान या जीवन के बहुत बड़े सुकून से कम नहीं रहा।

क्षेत्र के उथरदा में आयोजित राजस्व लोक अदालत न्याय आपके द्वार शिविर की जानकारी पाकर  प्रार्थी काना पिता हीरा मीणा अपने भाई धुला के साथ आया और शिविर प्रभारी सलुम्बर के उपखण्ड अधिकारी नरेश बुनकर को अपनी व्यथा सुनायी।

इसके अनुसार संवत् 2039 में प्रार्थी के स्वयं का नाम खाता संख्या 406 में काना पिता हीरा दर्ज था जो भू-प्रबंध में गलती से धन्ना हो गया जिसकी वजह से खातेदार करीब 34 वर्ष से दुरस्त करवाने हेतु इधर-उधर भटकता रहा मगर कुछ हो न पाया। इस समस्या के कारण प्रार्थी को अपने राजकीय व  निजी कार्य करवाने में काफी परेशानी हो रही थी।

इस पर प्रभारी अधिकारी ने शिविर स्थल पर ही प्रार्थीयान से नाम शुद्ध करवाने का प्रार्थना पत्र लेकर तहसीलदार सलुम्बर से हाथों-हाथ रिपोर्ट तैयार करवाकर राजस्व रेकार्ड में काना का नाम शुद्ध करने के आदेश जारी कर प्रार्थी काना को शिविर स्थल पर ही राहत प्रदान की गई।


correspondent

DesertTimes.in

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